महिलाओं में शरीर के आकार की तुलना में बहुत बड़े स्तन होने को डॉक्टरी भाषा में मैक्रोमास्टिया (Macromastia) कहा जाता है. आमतौर पर इसे सिर्फ एक कॉस्मेटिक पहलू माना जाता है, लेकिन एक ताजा अध्ययन के अनुसार इसका संबंध महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं से हो सकता है.
न्यूरोलॉजी क्लीनिकों में इलाज करा रही 687 महिलाओं के डेटा पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि बड़े स्तन वाली महिलाओं में गर्दन के दर्द की संभावना दोगुनी होती है. इसके अलावा, उनमें 'सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी' यानी गर्दन की नस दबने का खतरा भी दोगुने से अधिक देखा गया.
मैक्रोमास्टिया से पीड़ित लगभग 50% महिलाओं में ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (Obstructive Sleep Apnea) होने की आशंका अधिक पाई गई. इस बीमारी में सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं, जिससे सांस लेने का मार्ग बार-बार बाधित होता है और नींद पूरी नहीं हो पाती.
स्टडी का सबसे चौंकाने वाला निष्कर्ष यह रहा कि मैक्रोमास्टिया से पीड़ित महिलाओं में क्रोनिक माइग्रेन (गंभीर सिरदर्द) होने का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में लगभग 40% अधिक था. शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की न्यूरोलॉजिकल समस्याओं पर अभी और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है.
अध्ययन के अनुसार, कई महिलाएं इन समस्याओं से राहत पाने के लिए 'ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी' (स्तन का आकार घटाने का ऑपरेशन) का सहारा लेती हैं. हालांकि, सर्जरी का फैसला लेते समय गर्दन का दर्द सबसे मुख्य कारक बनकर सामने आता है.
मैक्रोमास्टिया का एक अधिक गंभीर और दुर्लभ रूप जाइंटोमास्टिया (Gigantomastia) कहलाता है, जिसके दुनिया भर में केवल 300 मामले दर्ज हैं. यह स्थिति गर्भावस्था, हार्मोनल असंतुलन या दवाओं के कारण हो सकती है. शारीरिक दर्द के साथ-साथ यह समस्या महिलाओं में चिंता, अवसाद और आत्मविश्वास की कमी जैसे मानसिक तनाव का कारण भी बनती है.