आजकल शिक्षा और करियर की वजह से कई बच्चे और युवा कम उम्र में ही घर छोड़कर दूसरे शहरों या देशों में रहने लगते हैं. यह फैसला भविष्य के लिए अच्छा लगता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से जोखिम भरा साबित हो रहा है. फिनलैंड यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों की हालिया स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि घर से दूर रहने वाले टीनएजर्स में हार्ट अटैक और दिल की अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. स्टडी के मुताबिक 17 साल की उम्र सबसे क्रिटिकल होती है, जब लाइफस्टाइल में बदलाव हृदय की संरचना पर बुरा असर डालते हैं. माता-पिता को अब इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा.
यूरोपियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी में प्रकाशित इस स्टडी में फिनलैंड और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने पाया कि घर छोड़ने के बाद युवाओं की दिनचर्या अचानक बदल जाती है. घर का पौष्टिक भोजन छूट जाता है और जंक फूड, तला-भुना खाना व डिब्बाबंद चीजें आम हो जाती हैं. कई बच्चे धूम्रपान और शराब जैसी आदतें भी अपना लेते हैं. इससे शरीर में फैट बढ़ता है, जो 17 साल की उम्र से हार्ट हेल्थ के लिए हानिकारक साबित होता है.
शोधकर्ताओं ने 9 से 24 वर्ष की आयु के 1803 बच्चों की सेहत का विस्तार से अध्ययन किया. DXA स्कैन से शरीर और पेट के फैट लेवल तथा मसल्स की मात्रा मापी गई. 17 और 24 साल के युवाओं के इकोकार्डियोग्राफी स्कैन से हार्ट की संरचना, फंक्शन, ब्लड शुगर, इंसुलिन और कोलेस्ट्रॉल स्तर जांचे गए. नतीजों से पता चला कि 17 साल की उम्र से अतिरिक्त फैट हार्ट स्ट्रक्चर में बदलाव लाता है और ब्लड पंप करने में अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे भविष्य में हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है.
घर से दूर रहने पर खान-पान के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है. परिवार की गैरमौजूदगी से स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है, जो ब्लड प्रेशर को अनियंत्रित कर सकता है. नींद की कमी और व्यायाम न करना हार्ट की धमनियों को कमजोर बनाता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार टीनएज शरीर की विकास का नाजुक समय है. अगर इस दौरान लाइफस्टाइल सही न रही तो कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं जल्दी शुरू हो जाती हैं.
स्टडी में पाया गया कि बचपन में मोटापा कम करने का सबसे अच्छा समय टीनएज है. 17-19 साल की उम्र में हेल्दी आदतें अपनाने से आगे चलकर हार्ट डिजीज का खतरा काफी घट सकता है. शोधकर्ताओं ने कहा कि 17 साल की उम्र वह पॉइंट है जहां बढ़ता फैट हार्ट के लिए नुकसानदायक हो जाता है. इससे पहले यह बढ़ना कुछ हद तक सुरक्षात्मक भी हो सकता है.
डॉक्टरों की सलाह है कि बाहर रह रहे छात्र अपनी डाइट पर खास ध्यान दें. बाहर का खाना कम करें, खुद सिंपल और पौष्टिक भोजन बनाएं तथा फल-सब्जियां ज्यादा लें. रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या योग करें. स्ट्रेस कम करने के लिए परिवार से नियमित बातचीत बनाए रखें. याद रखें, करियर जरूरी है लेकिन सेहत सबसे ऊपर है. माता-पिता को भी बच्चों की दिनचर्या पर नजर रखनी चाहिए.