गर्मी बढ़ते ही क्यों बिगड़ रहा है ब्लड शुगर? डायबिटीज मरीजों के लिए खतरा बन रहा है क्लाइमेट चेंज! ऐसे करें बचाव
बढ़ती गर्मी और बदलता मौसम डायबिटीज मरीजों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहा है. जानिए कैसे क्लाइमेट चेंज आपके ब्लड शुगर को प्रभावित करता है और इससे आप कैसे अपने शरीर को बचा सकते हैं.
आज के समय में क्लाइमेट चेंज सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा बल्कि यह हमारी सेहत को भी प्रभावित कर रहा है. खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए बढ़ती गर्मी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है. तापमान बढ़ने से शरीर को खुद को संतुलित रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसका सीधा असर ब्लड शुगर लेवल और इंसुलिन की कार्यक्षमता पर पड़ता है. अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए तो स्थिति बिगड़ सकती है.
गर्म मौसम शरीर के काम करने के तरीके को बदल देता है. ठंड के समय शरीर कैलोरी जलाकर खुद को गर्म रखता है जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है. लेकिन लंबे समय तक गर्मी रहने से यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है. जिसकी वजह से शरीर के लिए शुगर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. साथ ही लोग गर्मी के कारण कम एक्टिव रहते हैं जिससे वजन बढ़ने और शुगर लेवल बिगड़ने का खतरा और बढ़ जाता है.
डिहाइड्रेशन बन सकता है बड़ा खतरा
गर्मियों में पसीना ज्यादा आता है जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है. डिहाइड्रेशन की वजह से ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बढ़ सकता है. पानी की कमी किडनी के काम को भी प्रभावित करती है जिससे अतिरिक्त शुगर बाहर नहीं निकल पाती. इसलिए डायबिटीज मरीजों के लिए हाइड्रेशन बनाए रखना बेहद जरूरी है.
शरीर को ठंडा रखना क्यों है जरूरी?
डायबिटीज नसों और ब्लड वेसल्स को प्रभावित करता है जिससे शरीर के पसीना निकालने की क्षमता कम हो सकती है. ऐसी स्थिति में शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता और हीट एक्सॉर्शन का खतरा बढ़ जाता है. यह स्थिति कमजोरी चक्कर और थकान जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है जो मरीज के लिए खतरनाक हो सकती हैं.
गर्मी का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं बल्कि दवाओं पर भी पड़ता है. इंसुलिन और दूसरे दवाएं ज्यादा तापमान में खराब हो सकती हैं जिससे उनका असर कम हो जाता है. अगर दवाएं सही तरीके से स्टोर न की जाएं तो ब्लड शुगर कंट्रोल करना और भी मुश्किल हो सकता है.