Bitter Gourd Control Diabetes: करेला, जिसे 'बिटर गार्ड' या 'बिटर मेलोन' भी कहा जाता है, एक ऐसा आयुर्वेदिक औषधीय फल है जो अपनी कड़वी प्रकृति के बावजूद स्वास्थ्य के लिए कई फायदेमंद गुणों से भरपूर है. खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए, करेले को प्राकृतिक उपायों में अत्यधिक प्रभावी माना जाता है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, करेले में ऐसे यौगिक होते हैं जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं.
करेले में मॉमर्डिका चारैंशिया नामक सक्रिय यौगिक पाया जाता है, जो शरीर में इंसुलिन जैसे कार्य करता है. यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसके अलावा, करेले में पाए जाने वाले अन्य पोषक तत्व, जैसे कि विटामिन सी, आयरन, और एंटीऑक्सिडेंट्स, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं.
1. इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाना: करेले में मौजूद यौगिक रक्त में ग्लूकोज को कोशिकाओं में ले जाने में मदद करते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है.
2. ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म सुधारना: करेला पैंक्रियाज के बीटा सेल्स को सक्रिय कर इंसुलिन के स्राव को बढ़ावा देता है.
3.डायबिटीज से जुड़ी जटिलताओं को कम करना: नियमित रूप से करेले का सेवन हृदय स्वास्थ्य और मोटापे जैसी समस्याओं में भी मदद करता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए अतिरिक्त लाभ है.
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, करेले का सेवन कई रूपों में किया जा सकता है
करेले का रस: रोज़ सुबह खाली पेट 30-50 मि.ली. करेले का रस पीने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है.
सब्जी या सूप: करेले की सब्जी बनाकर या सूप के रूप में इसे नियमित आहार में शामिल करना भी लाभदायक है.
करेले के कैप्सूल या पाउडर: बाजार में उपलब्ध आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन का भी उपयोग किया जा सकता है.
हालांकि करेला डायबिटीज के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसे अत्यधिक मात्रा में लेने से रक्त शर्करा का स्तर अत्यधिक कम हो सकता है, जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं. गर्भवती महिलाओं और लो ब्लड शुगर वाले व्यक्तियों को इसका सेवन चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए.