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विवेक अग्निहोत्री ने दो महीने बाद भारत लौटते ही कौन-सी फिल्म देखी? बोले- 'गर्व महसूस हुआ'

फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने दो महीने बाद भारत लौटने पर सबसे पहले रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर देखी. उन्होंने सोशल मीडिया पर लंबा नोट लिखते हुए फिल्म को विजन कॉन्फिडेंस और टीमवर्क का बेहतरीन उदाहरण बताया. साथ ही आदित्य धर की डायरेक्शन स्किल्स की खुलकर सराहना की.

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Edited By: Babli Rautela
विवेक अग्निहोत्री ने दो महीने बाद भारत लौटते ही कौन-सी फिल्म देखी? बोले- 'गर्व महसूस हुआ'
Courtesy: Social Media

मुंबई: द कश्मीर फाइल्स के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने भारत लौटने के बाद सबसे पहले आदित्य धर की फिल्म धुरंधर देखी. वह पिछले दो महीनों से देश से बाहर थे. भारत आते ही उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फिल्म को लेकर अपने विचार साझा किए. उन्होंने साफ कहा कि फिल्म देखकर वह हैरान भी हैं और उन्हें गर्व भी महसूस हुआ है.

विवेक अग्निहोत्री ने अपने पोस्ट में लिखा कि दो महीने बाद भारत लौटकर उन्होंने सबसे पहले धुरंधर देखी. उनके अनुसार हैरान और गर्व यही दो शब्द हैं जो फिल्म देखने के बाद उनके मन में आए. उन्होंने कहा कि जो लोग फिल्ममेकिंग की प्रक्रिया को समझते हैं वे जानते हैं कि इस स्तर की फिल्म बनाना कितना कठिन होता है.

विवेक अग्निहोत्री को कैसी लगी रणवीर सिंह की धुरंधर

अग्निहोत्री ने कहा कि धुरंधर जैसी फिल्में संयोग से नहीं बनतीं. इसके पीछे मजबूत विजन गहरी राइटिंग और अपनी इंस्टिंक्ट पर भरोसा करने की ताकत होती है. उन्होंने माना कि आदित्य धर ने जिस आत्मविश्वास के साथ इस फिल्म को बनाया है वह आज के सिनेमा में कम ही देखने को मिलता है.

विवेक अग्निहोत्री ने फिल्म के प्रोडक्शन डिजाइन की भी खुलकर सराहना की. उन्होंने सैनी एस जोहरे के काम को पाथब्रेकिंग बताया और कहा कि यह सिर्फ सजावट नहीं बल्कि कहानी कहने का एक अहम जरिया है. इसके साथ ही उन्होंने शाश्वत सचदेव के संगीत को इनोवेटिव और भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ बताया. उनके मुताबिक म्यूजिक ने फिल्म के असर को कई गुना बढ़ा दिया.

सिनेमैटोग्राफी को बताया नई किताब

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी पर बात करते हुए विवेक अग्निहोत्री ने विकास नौलखा की तारीफ की. उन्होंने कहा कि धुरंधर की सिनेमैटोग्राफी युवा डीओपी के लिए एक नई टेक्स्टबुक की तरह है. हर फ्रेम सोच समझकर रचा गया लगता है और कहानी को मजबूती देता है.

विवेक अग्निहोत्री ने परफॉर्मेंस पर भी एक अलग नोट लिखा. उन्होंने कहा कि भले ही कुछ किरदारों पर ज्यादा चर्चा होगी लेकिन धुरंधर की असली जीत इसके छोटे और मामूली दिखने वाले किरदार हैं. उनके अनुसार हर कलाकार को सोच समझकर कास्ट किया गया है और हर किसी ने शानदार अभिनय किया है.  अग्निहोत्री ने कहा कि फिल्म के हर विभाग में बेहतरीन तालमेल दिखता है. उन्होंने लिखा कि जब हर डिपार्टमेंट एक साथ काम करता है तभी ऐसी फिल्म बनती है. यही वजह है कि धुरंधर पूरी तरह से एक राइटर डायरेक्टर की फिल्म लगती है जहां हर चीज कंट्रोल में नजर आती है.

आदित्य धर के डायरेक्शन पर टिप्पणी करते हुए विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि वह पहले भी उनके काम की तारीफ करते रहे हैं लेकिन इस फिल्म में वह बिल्कुल अलग स्तर पर नजर आए हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने धुरंधर सच्चे गर्व के साथ देखी है और उन्हें आदित्य धर पर गर्व है. साथ ही उन्होंने भारतीय सिनेमा पर भी गर्व जताया.