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India Daily

‘रेपिस्ट बचाओ अभियान’, छत्तीसगढ़ HC के ‘बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना रेप नहीं है’ वाले फैसले पर फूटा इस संगीतकार का गु्स्सा

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 2004 के एक मामले में रेप की सजा घटाकर रेप की कोशिश में बदलने के फैसले पर संगीतकार विशाल ददलानी ने अपना रिएक्शन साझा किया है. सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है.

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Edited By: Babli Rautela
‘रेपिस्ट बचाओ अभियान’, छत्तीसगढ़ HC के ‘बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना रेप नहीं है’ वाले फैसले पर फूटा इस संगीतकार का गु्स्सा
Courtesy: Social Media

मुंबई: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक हालिया फैसले ने कानूनी और सामाजिक हलकों में तीखी चर्चा छेड़ दी है. 2004 के एक मामले में अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा में बदलाव करते हुए दोषी को रेप के बजाय रेप की कोशिश का अपराधी माना. इसी फैसले पर संगीतकार विशाल ददलानी ने अपना रिएक्शन साझा किया है.

बताया गया कि अदालत ने कहा कि घटना के दौरान पूर्ण पेनिट्रेशन साबित नहीं हुआ था. इसके आधार पर सजा को कम कर दिया गया. इस पर कई लोगों ने असहमति जताई है.

सोशल मीडिया पर विशाल का रिएक्शन

बुधवार को विशाल ददलानी ने इंस्टाग्राम पर एक कानूनी रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि अदालत ने सजा में बदलाव किया है. इस पर रिएक्शन देते हुए उन्होंने न्यायिक फैसले की आलोचना की और सवाल उठाए. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि ऐसे फैसलों को सार्वजनिक रूप से सामने लाया जाना चाहिए ताकि लोगों को पता चले कि किस तरह के निर्णय दिए जा रहे हैं. उनका यह बयान तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. कई यूजर्स ने उनकी राय का समर्थन किया, जबकि कुछ ने इसे भावनात्मक प्रतिक्रिया बताया.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2004 का है. आरोप के अनुसार, एक व्यक्ति ने धमतरी जिले की एक महिला को बहला कर अपने घर ले जाकर उसके साथ जबरन यौन उत्पीड़न किया. शिकायत दर्ज होने के बाद मामला अदालत में चला. ट्रायल के दौरान पीड़िता के बयान में बदलाव आया. प्रारंभिक बयान में उसने यौन संबंध होने की बात कही थी, लेकिन बाद में उसने स्पष्ट किया कि पूर्ण पेनिट्रेशन नहीं हुआ था. मेडिकल जांच में कुछ संकेत मिले, लेकिन स्पष्ट रूप से रेप की पुष्टि नहीं की जा सकी.

6 अप्रैल 2005 को धमतरी की अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत दोषी ठहराया और सात साल की सजा सुनाई. बाद में Chhattisgarh High Court ने 16 फरवरी को सजा की समीक्षा करते हुए इसे धारा 376 के साथ 511 के तहत रेप की कोशिश में बदल दिया. सजा घटाकर तीन साल छह महीने कर दी गई और जुर्माना लगाया गया.