बॉलीवुड एक्ट्रेस तारा सुतारिया ने हाल ही में खुलासा किया कि उन्हें डिस्कैलकुलिया है. यह एक तरह का लर्निंग डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को संख्याओं और गणित से जुड़ी चीजों को समझने में परेशानी हो सकती है. जानिए इसके लक्षण, कारण और इससे निपटने के तरीकों के बारे में. कई लोगों को गणित मुश्किल लगता है या उन्हें हिसाब-किताब करने में परेशानी होती है. लेकिन कुछ लोगों के लिए नंबरों को समझना और रोजमर्रा के सामान्य गणितीय काम करना भी काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. ऐसी ही एक स्थिति को डिस्कैलकुलिया (Dyscalculia) कहा जाता है. एक्ट्रेस तारा सुतारिया ने हाल ही में बताया कि वह इस लर्निंग डिसऑर्डर के साथ जी रही हैं.
डिस्कैलकुलिया को आमतौर पर गणित से जुड़ी सीखने की कठिनाई के रूप में समझा जाता है. इसमें व्यक्ति को संख्याओं को पहचानने, उनके बीच संबंध समझने, गणना करने या गणितीय जानकारी को प्रोसेस करने में दूसरों की तुलना में अधिक कठिनाई हो सकती है.
डिस्कैलकुलिया एक न्यूरोडेवलपमेंटल लर्निंग डिसऑर्डर है, जो किसी व्यक्ति की संख्याओं और गणितीय अवधारणाओं को समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. इसे कभी-कभी आसान भाषा में 'मैथ डिस्लेक्सिया' भी कहा जाता है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि व्यक्ति कम बुद्धिमान है या वह दूसरी चीजें सीखने में कमजोर है. डिस्कैलकुलिया का असर मुख्य रूप से नंबर और गणित से जुड़ी क्षमताओं पर पड़ता है.
किसी व्यक्ति को साधारण जोड़-घटाव, नंबरों का क्रम, समय का अनुमान या पैसों का हिसाब समझने में अपेक्षाकृत ज्यादा समय लग सकता है. हालांकि, हर व्यक्ति में इसके लक्षण और उनकी गंभीरता अलग-अलग हो सकती है.
तारा सुतारिया ने बताया कि इस स्थिति से निपटने में उनके पिता उनका काफी साथ देते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तारा के पिता उनके अकाउंट्स से जुड़े हिसाब-किताब और जरूरी लेन-देन में मदद करते हैं. तारा ने बताया कि वह अपने पिता के साथ बैठकर चीजों को समझने की कोशिश करती हैं. उनकी अकाउंट टीम भी उन्हें सपोर्ट करती है. इससे यह समझा जा सकता है कि सही सहयोग और रोजमर्रा की जिंदगी में उपयुक्त रणनीतियों की मदद से ऐसी चुनौतियों को मैनेज किया जा सकता है.
डिस्कैलकुलिया से जूझने वाले व्यक्ति में कई तरह की कठिनाइयां देखी जा सकती हैं. हालांकि, जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति में सभी लक्षण मौजूद हों.
डिस्कैलकुलिया के संकेत बचपन से ही दिखाई दे सकते हैं. अगर कोई बच्चा लगातार गणित से जुड़ी बुनियादी चीजों को समझने में संघर्ष करता है, नंबरों को लेकर बार-बार भ्रमित होता है या सामान्य गणितीय कामों में उम्र के हिसाब से असामान्य कठिनाई महसूस करता है, तो उसकी परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बच्चे को 'मैथ में कमजोर' कहकर डांटने के बजाय उसकी कठिनाई को समझना ज्यादा जरूरी है. जरूरत पड़ने पर शिक्षक, मनोवैज्ञानिक या लर्निंग डिसऑर्डर से जुड़े विशेषज्ञ से मूल्यांकन कराया जा सकता है.