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पंजाब में अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए सरकार का बड़ा कदम, 432 करोड़ का बजट; जानें किसे मिलेगा लाभ

पंजाब सरकार ने माता-पिता का साया खो चुके और परिवार की देखभाल से वंचित बच्चों के लिए आर्थिक सहायता को मजबूत किया है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 432.38 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. अब तक 181.23 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं और करीब 2.45 लाख बच्चे योजना का लाभ उठा रहे हैं.

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Edited By: Shanu Sharma
पंजाब में अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए सरकार का बड़ा कदम, 432 करोड़ का बजट; जानें किसे मिलेगा लाभ
Courtesy: AI

पंजाब सरकार ने अनाथ और आश्रित बच्चों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सहायता योजना का दायरा मजबूत किया है. सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के मुताबिक प्रदेश में करीब 2.45 लाख बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं.

सरकार का जोर इस बात पर है कि पात्र बच्चों को आर्थिक मदद समय पर मिलती रहे. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई, रोजमर्रा की जरूरतों और भविष्य की तैयारी में रुकावट न आए.

2026-27 के लिए 432.38 करोड़ का प्रावधान

वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए सरकार ने 432.38 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं. इसमें से 181.23 करोड़ रुपये अब तक जारी किए जा चुके हैं. सरकार के मुताबिक आर्थिक सहायता लगातार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि जरूरतमंद बच्चों को सहायता के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े. सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि योजना के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के साथ उनकी दैनिक जरूरतों और आगे की तैयारी में आर्थिक सहारा मिल रहा है.

21 साल से कम उम्र के बच्चे पात्र

योजना के तहत 21 वर्ष से कम उम्र के उन बच्चों को सहायता दी जाती है, जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है. इसके अलावा ऐसे बच्चे भी इसके दायरे में आते हैं, जिनके माता-पिता दोनों घर से अनुपस्थित हैं. ऐसे बच्चों को भी योजना में शामिल किया गया है, जिनके माता-पिता शारीरिक या मानसिक रूप से ऐसी स्थिति में हैं कि वे अपने बच्चों की देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं. इस तरह योजना का उद्देश्य उन बच्चों तक सहायता पहुंचाना है, जिन्हें पारिवारिक संरक्षण का अभाव है.

मंत्री डॉ. बलजीत कौर के अनुसार, सरकार की कोशिश है कि आर्थिक परेशानियों के कारण किसी बच्चे की शिक्षा और भविष्य के सपने प्रभावित न हों. उनके मुताबिक बच्चों को दी जाने वाली मदद केवल उनकी तत्काल जरूरतों को पूरा करने का माध्यम नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ाने का जरिया भी है. सरकार का मानना है कि आर्थिक सहायता मिलने से पात्र बच्चे अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे और जरूरी खर्चों को पूरा करने में परिवार की कमी के बावजूद कुछ राहत पा सकेंगे.