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India Daily

'दो ऑस्कर भी बन सकते हैं बोझ...', रोजा जैसे पुराने काम से तुलना करने पर छलका एआर रहमान का दर्द

एआर रहमान ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि दो ऑस्कर जीतने के बाद भी उन पर दबाव बना रहा. उन्होंने बताया कि कैसे लोगों ने उन्हें यह महसूस कराया कि वह रोजा जैसे अपने पुराने कामों जितना अच्छा संगीत अब नहीं बना रहे.

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Edited By: Babli Rautela
'दो ऑस्कर भी बन सकते हैं बोझ...', रोजा जैसे पुराने काम से तुलना करने पर छलका एआर रहमान का दर्द
Courtesy: Social Media

मुंबई: मशहूर संगीतकार एआर रहमान ने हाल ही में अपने करियर को लेकर एक ईमानदार और चौंकाने वाला बयान दिया है. उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा बार बार उनके पुराने सुपरहिट म्यूजिक से तुलना किए जाने ने उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया. रहमान के मुताबिक खासतौर पर 90 के दशक के गानों को लेकर लोगों की नॉस्टैल्जिया भरी सोच उन्हें गुमराह करने लगी थी.

द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया को दिए इंटरव्यू में रहमान ने बताया कि जब भी लोग उनसे मिलते थे तो रोजा फिल्म का उदाहरण जरूर देते थे. उनका कहना था कि लोग अक्सर कहते थे कि रोजा में उनका संगीत बहुत शानदार था और अब वैसा नहीं रहा. इस तरह की बातें अगर सही मूड में न सुनी जाएं तो सोच पर असर डालती हैं.

खुद को साबित करने का लिया फैसला

इस मानसिक दबाव से निकलने के लिए एआर रहमान ने खुद को लगातार काम में झोंकने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि 2019 से 2025 के बीच उन्होंने करीब 20 से 30 फिल्मों में काम किया. यह फैसला किसी मजबूरी में नहीं बल्कि खुद को दोबारा साबित करने और नई पीढ़ी के श्रोताओं से जुड़ने के लिए लिया गया था.

हालांकि रहमान ने यह भी माना कि पिछले 8 सालों में हिंदी फिल्मों में उनके प्रोजेक्ट्स कुछ कम हुए हैं लेकिन इसके बावजूद पिछले 6 साल उनके करियर के सबसे व्यस्त और प्रोडक्टिव साल रहे. उन्होंने कहा कि अब जो भी डायरेक्टर उनके पास आता है वह हाल के कामों का उदाहरण देता है न कि 90 के दशक का.

मणिरत्नम की फिल्म का जिक्र

रहमान ने बताया कि अब डायरेक्टर उनसे कहते हैं कि मणिरत्नम सर की फिल्म ठग लाइफ में उनका काम शानदार था. इससे उन्हें यह भरोसा मिला कि पिछले 6 सालों का काम आने वाली पीढ़ी के लिए एक मजबूत आधार बन चुका है. उनके अनुसार अब उनके पास अगली पीढ़ी के लिए भी पर्याप्त संगीत है.

एआर रहमान ने यह भी कहा कि वह लगातार खुद को नया रूप देने में विश्वास रखते हैं. उनके मुताबिक समय के साथ कलाकार और श्रोता दोनों बदलते हैं. ऐसे में पुराने तरीकों पर टिके रहना सही नहीं. उन्होंने कहा कि रेडियो या टीवी पर आने वाला संगीत पहले उन्हें खुद पसंद आना चाहिए.