menu-icon
India Daily

गिलास-चम्मच से भी म्यूजिक बना देते थे आरडी बर्मन, यहां जानें उनके गानों से जुड़े दिलचस्प किस्से

आरडी बर्मन की उनकी धुनें आज भी लोगों के दिलों में बसती हैं. लेकिन उनकी म्यूजिक बनाने की शैली और गानों के पीछे की दिलचस्प कहानियां भी कम रोचक नहीं हैं.

Shilpa Shrivastava
गिलास-चम्मच से भी म्यूजिक बना देते थे आरडी बर्मन, यहां जानें उनके गानों से जुड़े दिलचस्प किस्से
Courtesy: AI Generated

मुंबई: 27 जून 1939 को कोलकाता में जन्मे राहुल देव बर्मन यानी आरडी बर्मन या पंचम दा हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय संगीतकारों में से एक हैं. उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया. उनकी धुनें आज भी लोगों के दिलों में बसती हैं. लेकिन उनकी म्यूजिक बनाने की शैली और गानों के पीछे की दिलचस्प कहानियां भी कम रोचक नहीं हैं.

'पिया तू अब तो आजा':

रिकॉर्डिंग चल रही थी. आशा भोसले गा रही थीं. पंचम दा कंट्रोल रूम में बैठे थे. अचानक मजाक में उन्होंने माइक पर कहा – “मोनिका... ओ माय डार्लिंग”. कोई नहीं सोचता था कि यह छोटी लाइन गाने का सबसे यादगार हिस्सा बन जाएगी. आज भी लोग इस गाने को “मोनिका” कहकर याद करते हैं.

'महबूबा-महबूबा':

'शोले' के लिए यह गाना बन रहा था. पंचम दा खुद को अच्छा गायक नहीं मानते थे, लेकिन इस गाने में उनकी खुरदुरी आवाज ही सबसे सूट करती थी. उन्होंने खुद गाया और गाना हिट हो गया. 

'चुरा लिया है तुमने जो दिल को':

पंचम दा हर छोटी-छोटी आवाज में संगीत ढूंढते थे. इस गाने की रिकॉर्डिंग में उन्होंने गिलास, चम्मच और धातु की चीजों से खनक निकाली. लोग हैरान थे, लेकिन यही खनक गाने की पहचान बन गई.

'बाहों में चले आओ':

इस गाने में उन्होंने जानबूझकर संगीत हल्का रखा. कोई भारी ऑर्केस्ट्रा नहीं. सिर्फ लता मंगेशकर की आवाज और भावनाएं. पंचम दा कहते थे कि यह गाना रात में चुपके से गाया जा रहा है, इसलिए संगीत कम होना चाहिए.

'दम मारो दम':

देव आनंद को डर था कि गाने के बोल विवादास्पद हो सकते हैं. लेकिन पंचम दा ने इसे हिप्पी कल्चर की धड़कन की तरह बनाया. इलेक्ट्रिक गिटार और आशा भोसले की आवाज ने इसे युवाओं का एंथम बना दिया.

'ओ हसीना जुल्फों वाली':

पंचम दा चाहते थे कि गाना दर्शकों को सीट से उठा दे. उन्होंने ड्रम्स और गिटार का आक्रामक इस्तेमाल किया. तेज रफ्तार ने गाने को यादगार बना दिया.

'ये शाम मस्तानी':

पंचम दा ने इतनी सहज धुन बनाई कि लगता है हमेशा से मौजूद थी. किशोर कुमार की आवाज में मस्ती भर दी. गाना सुनते ही शाम की ठंडी हवा महसूस होती है.

'रैना बीती जाए':

इस गाने में शास्त्रीय संगीत और दर्द दोनों थे. लता मंगेशकर की आवाज ने स्टूडियो को सन्नाटे में डुबो दिया. गाना पूरा होने के बाद कुछ देर तक कोई बोल नहीं पाया.

'हमें तुमसे प्यार कितना':

पंचम दा ने एक ही गाने के दो वर्शन बना, एक किशोर कुमार और दूसरा परवीन सुल्ताना की आवाज में. दोनों ही अलग-अलग अंदाज में दिल छू लेते हैं.

'मुसाफिर हूं यारों':

सादगी इस गाने की खासियत थी. पंचम दा ने धुन को हल्का रखा ताकि शब्द सीधे दिल तक पहुंचें. सुनने वाला खुद को मुसाफिर महसूस करने लगता है.