मुंबई: भारतीय संगीत जगत में लता मंगेशकर का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. उनकी आवाज किसी भी फिल्म की सफलता की गारंटी मानी जाती थी. आएगा आनेवाला, अजीब दास्तां है ये, आपकी नजरों ने समझा, प्यार किया तो डरना क्या, मेरा साया साथ होगा और आज फिर जीने की तमन्ना जैसे अनगिनत गीतों ने उन्हें सुर साम्राज्ञी बना दिया.
साल 1962 में जब लता मंगेशकर अपने करियर के चरम पर थीं, तब उनकी उम्र मात्र 33 साल थी. उसी दौरान उनकी जिंदगी में एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको हिला कर रख दिया. अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और हालत इतनी गंभीर हो गई कि वे करीब तीन महीने तक बिस्तर से उठ नहीं सकीं.
इस चौंकाने वाली घटना का जिक्र लता मंगेशकर ने मशहूर लेखिका नसरीन मुन्नी कबीर को दी गई बातचीत में किया था. उन्होंने बताया कि एक दिन उन्हें पेट में तेज बेचैनी हुई और इसके बाद भयानक उल्टियां शुरू हो गईं. उल्टी का रंग हरा था, जिससे डॉक्टर भी हैरान रह गए. लता मंगेशकर की हालत इतनी खराब थी कि डॉक्टरों को घर पर ही एक्स रे मशीन मंगवानी पड़ी. जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें धीरे धीरे जहर दिया जा रहा है. यह सुनकर पूरा परिवार स्तब्ध रह गया. यह लता मंगेशकर की जिंदगी का सबसे बुरा दौर था.
जहर दिए जाने की आशंका के बाद लता मंगेशकर की बहन उषा मंगेशकर ने बड़ा फैसला लिया. उन्होंने किचन की जिम्मेदारी खुद संभाल ली और साफ कहा कि अब से लता के लिए खाना परिवार ही बनाएगा. इसके बाद एक नौकर बिना पैसे लिए अचानक काम छोड़कर चला गया, जिससे शक और गहरा गया.
लता मंगेशकर ने बताया था कि परिवार को यह पता चल गया था कि जहर देने वाला कौन था. हालांकि उनके पास पुख्ता सबूत नहीं थे, इसलिए उस व्यक्ति के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई. मंगेशकर परिवार ने इस दर्दनाक घटना को हमेशा चुपचाप सहा. इस घटना के बाद एक अफवाह फैल गई थी कि जहर दिए जाने के कारण लता मंगेशकर की आवाज चली गई है. खुद लता ने इस बात को पूरी तरह गलत बताया. उन्होंने साफ कहा था कि किसी भी डॉक्टर ने उनसे यह नहीं कहा कि वे दोबारा गा नहीं पाएंगी.
लता मंगेशकर के फैमिली डॉक्टर आर पी कपूर ने भी पूरा भरोसा जताया था कि वे पूरी तरह ठीक होकर फिर से गाएंगी. लंबे इलाज और आराम के बाद लता धीरे धीरे स्वस्थ होने लगीं और स्टूडियो लौटने की तैयारी करने लगीं.
लता मंगेशकर के ठीक होने के बाद उनके साथ पहला गाना रिकॉर्ड करवाने वाले संगीतकार हेमंत कुमार थे. फिल्म बीस साल बाद के लिए उन्होंने गाना कहीं दीप जले कहीं दिल रिकॉर्ड किया. यह गाना सुपरहिट साबित हुआ और इसी गीत के लिए लता मंगेशकर को दूसरा फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. इस अवॉर्ड ने उन सभी अफवाहों को खत्म कर दिया कि उनकी आवाज पर कभी असर पड़ा था.