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'मुझे जूठन पचती नहीं ना पान की न सम्मान की..' बवाल है जुनैद खान की फिल्म महाराज

बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान के बेटे जुनैद खान इन दिनों अपनी फिल्म महाराज को लेकर काफी चर्चा में हैं. एक्टर की फिल्म का पहले तो काफी विरोध हुआ लेकिन ऑडियंस का इनको भरपूर प्यार मिल रहा है. आज हम आपको इस फिल्म के कुछ बेहतरीन डायलॉग्स के बारे में बताते हैं जिसको सुन आप भी दंग रह जाएंगे.

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'मुझे जूठन पचती नहीं ना पान की न सम्मान की..' बवाल है जुनैद खान की फिल्म महाराज
Courtesy: Social Media

Junaid Khan: बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान के बेटे जुनैद खान अपना बॉलीवुड में डेब्यू कर चुके हैं. हाल ही में आमिर खान के बड़े बेटे जुनैद खान ने महाराज में अपनी एक्टिंग का जलवा दिखाया है. फिल्म में Junaid Khan को देखकर एक बात तो साफ पता चलती हैं कि बेहतरीन एक्टिंग उन्हें अपने पिता आमिर खान से विरासत में मिली है. महाराज देखने के बाद आप उनकी एक्टिंग के कायल हो जाएंगे. ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि भले ही आमिर खान एक सुपरस्टार के बेटे हैं जिन्होंने अपने पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया.

हालांकि, फिल्म के डायलॉग की बात करें तो इसमें एक से बढ़कर एक डायलॉग है जो आपका गुरूर बढ़ा देगा. हर Dialogue की डिलीवरी भी जुनैद ने काफी बढ़िया तरीके से की है. तो चलिए आज हम आपको Maharaj के बेहतरीन डायलॉग्स के बारे में बताते हैं.

  • ‘मजदूर हड़ताल पर जा सकते हैं, ईश्वर नहीं.’
  • ‘मुझे जूठन पचती नहीं ना पान की न सम्मान की..’
  • ‘सही और गलत जानने में धर्म की नहीं बल्कि बुद्धि की जरूरत होती है.’
  • ‘ताला अंदर से लगा हो और चाभी हाथ में हो फिर भी इंसान बंदी बनकर रहता है तो वो कैद उसका निर्णय होता है.’
  • ‘जन्म से वैष्णव हूं, कर्म से ब्राह्मण, स्वभाव से क्षत्रिय हूं, और ध्येय है मेरा क्षुद्र का, इसलिए जहां भी गंदगी देखता हूं, वहां साफ करने की कोशिश करता हूं.’
  • ‘सवाल न पूछे वो भक्त अधूरा और जवाब न दे सके वो धर्म अधूरा’ 

जुनैद खान स्टारर फिल्म महाराज की कहानी की बात करें तो यह एक ऐसे 'महाराज' की कहानी है जो कि धर्म के नाम पर लोगों का फायदा उठाता है और उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ करता है. धर्म के नाम पर कई बुराइयों को बढ़ावा देता है. करसन दास जो कि समाज सुधारक और पत्रकार थे. वह लोगों के आंखों से धर्म के नाम पर बंधी पट्टी को हटाना चाहते हैं और उन्हें ये समझाना चाहते हैं कि आस्था में हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं.