Ikka Movie Review: 'इक्का' में फीके पड़े सनी देओल! 'रहमान डकैत' का भी नहीं चला जादू, देखने से पहले पढ़ लें रिव्यू
सनी देओल का गुस्सा, जो उनकी फिल्मों का ट्रेडमार्क रहा है, इस बार सिर्फ दो सीन तक सीमित रह गया. अक्षय खन्ना ने अपनी भूमिका अच्छे से निभाई है, लेकिन यादगार डायलॉग या सीन की कमी खलती है. रहमान डकैत वाला जादू भी फिल्म में फीका सा नजर आया. फिल्म में कुल दो गाने हैं, जो दर्शकों को बांधने में पूरी तरह नाकाम रहे.
Ikka Movie Review: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सनी देओल और अक्षय खन्ना 29 साल बाद एक साथ नजर आए हैं. आखिरी बार दोनों ने 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'बॉर्डर' में काम किया था. अब उनकी नई फिल्म 'इक्का' शुक्रवार को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई है. ट्रेलर देखकर दर्शक काफी उत्साहित थे, लेकिन पूरी फिल्म देखने के बाद ज्यादातर लोग निराश नजर आ रहे हैं.
'इक्का' में फीके पड़े सनी देओल!
फिल्म 'इक्का' एक लीगल ड्रामा है, जिसमें कोर्ट रूम के केस को केंद्र में रखकर कहानी आगे बढ़ती है. कहानी शुरू से ही काफी हद तक अनुमान लगाने लायक है. पहले सीन में ही पता चल जाता है कि असल में हुआ क्या था. बाकी ढाई घंटे दर्शक बस इंतजार करते रहते हैं कि फिल्म इसे कैसे पेश करेगी. मेकर्स ने कहानी को काफी खींचा है, जिसकी वजह से बीच-बीच में बोरियत महसूस होती है. आखिरी 15 मिनट में ट्विस्ट देने की कोशिश की गई है, लेकिन वह भी जबरदस्ती और कमजोर लगता है.
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निर्देशक सिद्धार्थ पी मल्होत्रा ने फिल्म को 90 के दशक के स्टाइल पर बनाया है. इसमें इमोशंस इतने ज्यादा घुसा दिए गए हैं कि फिल्म का थ्रिल पूरी तरह गायब हो गया है. शुरुआती एक घंटे में हर दो सीन के बाद इमोशनल सीन आता है, जिससे रफ्तार बिल्कुल धीमी पड़ जाती है. कोर्ट रूम के सीन देखने लायक हैं, लेकिन उतने दमदार और रोमांचक नहीं जितनी उम्मीद थी. अगर सनी देओल और अक्षय खन्ना को एक-दूसरे के खिलाफ वकील के रूप में दिखाया जाता तो फिल्म और मजेदार हो सकती थी.
फीका सा नजर आया रहमान डकैत वाला जादू
सनी देओल का गुस्सा, जो उनकी फिल्मों का ट्रेडमार्क रहा है, इस बार सिर्फ दो सीन तक सीमित रह गया. अक्षय खन्ना ने अपनी भूमिका अच्छे से निभाई है, लेकिन यादगार डायलॉग या सीन की कमी खलती है. रहमान डकैत वाला जादू भी फिल्म में फीका सा नजर आया. फिल्म में कुल दो गाने हैं, जो दर्शकों को बांधने में पूरी तरह नाकाम रहे.
सबसे बड़ी निराशा यह है कि दो बड़े कलाकारों को लेकर भी मेकर्स कोई खास या याद रखने लायक सीन नहीं बना पाए. पूरी फिल्म में भावनाओं का बोझ इतना ज्यादा है कि थ्रिलर का तड़का कहीं नहीं दिखता.