मुंबई: दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेता विवेक ओबेरॉय के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए आदेश पारित करने की बात कही है. कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह जल्द ही ऐसे आदेश पारित करेगा, जिससे कोई भी व्यक्ति या संस्था विवेक की अनुमति के बिना उनके नाम, चेहरे, छवि या पहचान का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा.
विवेक ओबेरॉय ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनके नाम से फर्जी अकाउंट बनाए जा रहे हैं. इन अकाउंट्स से उनकी नकल करके अनधिकृत मर्चेंडाइज बेचा जा रहा है. साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके उनके चेहरे को मॉर्फ करके गलत और आपत्तिजनक वीडियो व इमेज बनाई जा रही हैं. इनमें से कुछ कंटेंट अपमानजनक, गलत और मानहानिकारक हैं, जो उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं और कमर्शियल वैल्यू को कम कर रहे हैं.
याचिका में कहा गया है कि केवल विवेक ओबेरॉय ही अपनी पर्सनैलिटी - नाम, चेहरा, आवाज, लुक आदि के कमर्शियल इस्तेमाल पर नियंत्रण रखते हैं. बिना उनकी सहमति या एक्सप्रेस अनुमति के कोई भी व्यक्ति इनका दुरुपयोग, नकल या कमर्शियल फायदा नहीं उठा सकता. जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा- 'हां, हम आदेश पारित करेंगे.'
यह फैसला बॉलीवुड में बढ़ती डीपफेक और AI की समस्या को देखते हुए महत्वपूर्ण है. इस साल ही कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट विकास पहवा के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की थी. पिछले साल करण जौहर, सलमान खान, अजय देवगन, ऋतिक रोशन, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन जैसे कई बड़े सितारों को इसी तरह की सुरक्षा मिली थी.
विवेक ओबेरॉय अब बिजनेस में भी सक्रिय हैं, ने अपनी याचिका में कई अज्ञात पक्षों को शामिल किया है. उन्होंने स्थायी इंजंक्शन की मांग की है ताकि फर्जी अकाउंट्स, गलत कंटेंट और अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगे. यह मामला सेलिब्रिटीज के लिए डिजिटल युग में अपनी पहचान बचाने की बढ़ती चुनौती को दर्शाता है. AI और डीपफेक के बढ़ते इस्तेमाल से सितारों की इमेज और कमाई दोनों पर खतरा मंडरा रहा है.