नई दिल्ली: लोकसभा में हाल ही में हुए भारी हंगामे को लेकर स्पीकर ओम बिरला का एक बड़ा बयान सामने आया है. स्पीकर ने बताया कि उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का अनुरोध किया था. स्पीकर के अनुसार, उस समय लोकसभा का माहौल बेहद तनावपूर्ण था और कांग्रेस के कुछ सांसदों के व्यवहार को देखते हुए यह आशंका थी कि कोई अप्रिय घटना हो सकती है.
ओम बिरला ने कहा कि अगर ऐसी कोई घटना घटती, तो इससे न केवल प्रधानमंत्री की सुरक्षा को खतरा होता, बल्कि लोकतंत्र की गरिमा को भी गंभीर नुकसान पहुंचता. स्पीकर ओम बिरला ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस के सांसद पीएम मोदी पर शारीरिक हमला कर सकते थे.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही बाधित होने पर गहरी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से सूचना थी कि कांग्रेस के नेतृत्व में कुछ विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान अव्यवस्था फैला सकते हैं. स्पीकर के अनुसार, यदि कोई अप्रिय घटना होती तो इससे देश की प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुंचता.
स्पीकर बिरला ने बताया कि विपक्षी सांसद उनके आसन के चारों ओर खड़े हो गए थे. इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को सदन में न आने की सलाह दी. उनका कहना था कि संसद का इतिहास इस बात का साक्षी है कि राजनीतिक मतभेदों को कभी भी शारीरिक या आक्रामक विरोध में नहीं बदला गया.
हंगामे की शुरुआत तब हुई जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक का उल्लेख करने पर जोर दिया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने इसका कड़ा विरोध किया. इसी मुद्दे पर सदन दिन में कई बार स्थगित करना पड़ा.
शाम पांच बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विरोध और तेज हो गया. कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में महिला सांसद प्रधानमंत्री की सीट की ओर बढ़ीं. आसन पर मौजूद भाजपा सांसद संध्या राय ने स्थिति को संभालते हुए पूरे दिन के लिए सदन स्थगित कर दिया.