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Bhool Chook Maaf OTT Release: ‘भूल चूक माफ’ अब ओटीटी पर भी नहीं होगी रिलीज, PVR ने ठोका था 60 करोड़ का मुकदमा

Bhool Chook Maaf OTT Release: राजकुमार राव और वामिका गब्बी अभिनीत फिल्म ‘भूल चूक माफ’ मुश्किलों में फंस गई है. मैडॉक फिल्म्स ने भारत-पाक तनाव और पहलगाम हमले का हवाला देकर 8 मई को फिल्म की 9 मई की थिएटर रिलीज रद्द कर दी और 16 मई को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज की घोषणा की.

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Edited By: Babli Rautela
Bhool Chook Maaf OTT Release: ‘भूल चूक माफ’ अब ओटीटी पर भी नहीं होगी रिलीज, PVR ने ठोका था 60 करोड़ का मुकदमा
Courtesy: Social Media

Bhool Chook Maaf OTT Release: राजकुमार राव और वामिका गब्बी अभिनीत फिल्म ‘भूल चूक माफ’ मुश्किलों में फंस गई है. मैडॉक फिल्म्स ने भारत-पाक तनाव और पहलगाम हमले का हवाला देकर 8 मई को फिल्म की 9 मई की थिएटर रिलीज रद्द कर दी और 16 मई को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज की घोषणा की. लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने पीवीआर आईनॉक्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए फिल्म की ओटीटी रिलीज पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने इसे समझौते का उल्लंघन माना. अगली सुनवाई 16 जून 2025 तक फिल्म किसी भी प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं होगी.

पीवीआर आईनॉक्स ने मैडॉक फिल्म्स पर 60 करोड़ रुपये का मुकदमा दायर किया, जिसमें कहा गया कि 6 मई को हुए समझौते के तहत फिल्म को 9 मई को सिनेमाघरों में रिलीज करना था. पीवीआर के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनयार मैडन ने कोर्ट में बताया कि मैडॉक ने आखिरी समय में ईमेल भेजकर ओटीटी रिलीज की सूचना दी. पीवीआर ने प्रमोशन में भारी निवेश किया, 31 दिल्ली थिएटर्स में प्रचार शुरू किया और हजारों टिकट बुक हो चुके थे. समझौते में 8 हफ्ते की थिएटर विंडो अनिवार्य थी.

मैडॉक की दलील खारिज

मैडॉक के वकील वेंकटेश धोंड ने दावा किया कि 8 हफ्ते की होल्डबैक शर्त केवल थिएटर रिलीज पर लागू होती है. उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं और कम बुकिंग का हवाला दिया. लेकिन जस्टिस अरिफ डॉक्टर ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पीवीआर ने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं. आखिरी समय में रद्दीकरण से पीवीआर की साख और वित्तीय नुकसान हुआ. कोर्ट ने माना कि फिल्म की मालिकाना हक होने के बावजूद मैडॉक को समझौता तोड़ने का अधिकार नहीं था.

अगली सुनवाई तक फिल्म अटकी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मैडॉक को निर्देश दिया कि वह 16 जून 2025 की सुनवाई तक फिल्म को ओटीटी या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ न करे. पीवीआर ने कोर्ट में जोर दिया कि यह मुकदमा भविष्य में अन्य निर्माताओं को ऐसी हरकतों से रोकने के लिए भी है. इस फैसले ने थिएटर इंडस्ट्री के लिए एक मिसाल कायम की है.