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क्यों वोटरों को लुभाते हैं मोदी-योगी, कश्मीर से कन्याकुमारी तक चुनावी सभाओं में डिमांड, वजह क्या है?

Lok Sabha Elections 2024: नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ, दोनों बेहद सख्त प्रशासक रहे हैं. अब बीजेपी का एक धड़ा मानता है कि मोदी के सही उत्तराधिकारी योगी ही हैं. अपने स्पष्टवादी बयानों, माफियाओं के खिलाफ सख्त तेवर और दंगों पर जीरो टॉलरेंस की नीतियों ने देशभर में उन्हें चर्चित बना दिया है. बाबा के बुलडोजर मॉडल की चर्चा भी जमकर होती है. आइए जानते हैं क्यों ये दोनों लोकप्रिय हैं.

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Yogi Adityanath और PM Narendra Modi
Courtesy: सोशल मीडिया.

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में दो चेहरे, पूरे देश में छाए हुए हैं. एक चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) खुद हैं, दूसरे हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath). दोनों की राजनीति में कुछ ऐसी समानताएं हैं कि लोग योगी को मोदी का सही उत्तराधिकारी समझते हैं. असल में, मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी भी राजनीति में अजेय रहे, वही हाल योगी आदित्यनाथ का भी हो गया है. साल 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में मोदी और योगी की जोड़ी ने जो कमाल किया था, उसके बाद से ही योगी आदित्यनाथ की डिमांड हर राज्य में बढ़ती चली गई. 

योगी आदित्यनाथ के उदय ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को नया मोदी दे दिया है. गेरुआ वस्त्र पहनने वाले इस संन्यासी ने जबसे राजनीति शुरू की है, देश का सियासी माहौल बदल गया है. योगी आदित्यनाथ का 'बुलडोजर मॉडल' देशभर में लोकप्रिय है. जब भी किसी अवैध अतिक्रमण को हटाने की बात होती है, किसी माफिया के खिलाफ एक्शन लेने की बात सामने आती है, योगी का यह मॉडल, बीजेपी शासित राज्यों में उनके मुख्यमंत्री अपना लेते हैं.

योगी आदित्यनाथ अपने तेवर और कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं. वे माफियाओं पर कड़े एक्शन लेते हैं, शराब माफियाओं की संपत्तियों को जब्त कर लेते हैं और दंगों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाते हैं. जब साल 2020 में देशभर में एंटी CAA-NRC दंगे भड़के थे, तब भी योगी आदित्यनाथ ने इन्हें लेकर सख्ती बरती थी. उनके स्पष्ट निर्देश थे कि दंगाइयों से सख्ती से निपटें, उनके पोस्टर शहरभर में लगेंगे और उनकी संपत्तियां कुर्क कर ली जाएंगी. योगी आदित्यनाथ ने 2023 में हुए प्रयागराज में बम कांड पर विधानसभा में कहा था कि वे माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे.

क्यों इतने लोक प्रिय हो रहे हैं योगी आदित्यनाथ?
प्रयागराज बमकांड के सूत्रधार बाहुबली अतीक अहमद और अशरफ की ओर उनका इशारा था. दोनों मिट्टी में मिल गए. मुख्तार अंसारी की हाल ही में मौत हुई है. विकास दुबे कांड शायद की किसी को भूला हो. योगी राज में माफियाओं के ऊपर एक के बाद एक कई एक्शन हुए. यही वजह रही कि उनकी लोकप्रियता साल-दर-साल बढ़ती गई.

हिंदुत्ववादी छवि को भुना रहे हैं योगी-मोदी 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छवि हिंदुत्ववादी नेता के तौर पर रही है. वे गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान भी अपने फैसलों से हिंदू हृदय सम्राट कहलाने लगे. वे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पक्षधर हैं. मंदिरों में बढ़-चढ़कर जाते हैं और हिंदुत्व विरोधी पार्टियों की जमकर आलोचना करते हैं. वे लाल कृष्ण आडवाणी की राजनीति के उत्तराधिकारी थे. अब वैसे ही तेवर योगी आदित्यनाथ के हैं.
 
योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व के साथ-साथ सुशासन के मॉडल पर चलते हैं. वे भगवा वेश में रहते हैं. उन्हें देशभर में लोग पंसद करते हैं. योगी आदित्यनाथ पार्टी की बैठकों से लेकर राज्यों में हो रही जनसभाओं तक, खूब पसंद किए जाते हैं. स्टार प्रचारकों की लिस्ट में भी उनका नाम नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह के बाद चौथे नेता के तौर पर होती है. 

योगी सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सिमटे नहीं हैं. रविवार को वे कश्मीर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करने वाले हैं. उत्तराखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान और दक्षिण भारतीय राज्यों में भी वे जनसभाएं करते हैं. उनकी रैलियों में भारी भीड़ उमड़ती है. जितना व्यस्त मोदी का चुनावी शेड्यूल होता है, वैसा ही योगी का होता है. 

मोदी से अलग है योगी का अंदाज 
योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व के फायरब्रांड नेता हैं. मोदी अब संतुलित और सधे नजर आते हैं लेकिन योगी आदित्यनाथ के तेवर बेहद अलग हैं. योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता का ही असर है कि साल 2019 में हुए लोकसभा और 2022 में विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने बेहद शानदार काम किया. मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ का हिंदू युवा वाहिनी बेहद सक्रिय संगठन रहा है. योगी आदित्यनाथ कट्टर हिंदू की छवि पेश करते हैं. वे नाम बदलने में भी माहिर हैं, उन्होंने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज कर दिया था. कई जगहों के नाम उनकी सरकार में बदले गए.  

विकास भी और माफियाओं का विनाश भी
योगी आदित्यनाथ कठोर प्रशासकों में गिने जाते हैं. उनकी लोकप्रियता की एक वजह ये भी है. योगी ने यूपी में निवेशकों का भी ध्यान खींचा है. वे एक महत्वाकांक्षी फिल्म सिटी प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहे हैं. उनकी लोकप्रियता हर दिन बढ़ रही है. बीजेपी पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का भी मानना है कि सही मायने में नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी अमित शाह नहीं, योगी आदित्यनाथ हैं. बीजेपी जिस तरह से उन्हें पेश कर रही है, ऐसा लग भी रहा है कि उन्हें बड़ी भूमिका आने वाले दिनों में मिल सकती है.