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हायर एजुकेशन में सबसे बड़ा बदलाव; UGC, AICTE और NCTE की विदाई, सिंगल रेगुलेटर को कैबिनेट की हरी झंडी

केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा व्यवस्था को सरल बनाने के लिए सिंगल रेगुलेटर के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके तहत UGC, AICTE और NCTE का विलय होगा.

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Edited By: Reepu Kumari
हायर एजुकेशन में सबसे बड़ा बदलाव; UGC, AICTE और NCTE की विदाई, सिंगल रेगुलेटर को कैबिनेट की हरी झंडी
Courtesy: GEMINI

नई दिल्ली: भारत के हायर एजुकेशन सिस्टम में लंबे समय से चर्चा में रहे बड़े बदलाव को अब औपचारिक मंजूरी मिल गई है. केंद्रीय कैबिनेट ने उस विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिसके तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को मर्ज किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था ज्यादा आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी.

इस प्रस्तावित कानून को पहले भारत का उच्च शिक्षा आयोग विधेयक कहा जा रहा था, लेकिन अब इसका नाम विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण विधेयक रखा गया है. यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत सुझाए गए एकल उच्च शिक्षा नियामक के विचार को जमीन पर उतारने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

क्या बदलेगा मौजूदा ढांचा

नए कानून के लागू होने पर उच्च शिक्षा के लिए एक ही नियामक संस्था होगी. अब तक गैर-तकनीकी शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और शिक्षक शिक्षा के लिए अलग-अलग संस्थाएं काम कर रही थीं. सरकार का कहना है कि इससे नियमों के टकराव और मंजूरी में होने वाली देरी कम होगी. हालांकि मेडिकल और लॉ कॉलेज इस नए रेगुलेटर के दायरे से बाहर रहेंगे.

चार हिस्सों में बंटे होंगे काम

सिंगल रेगुलेटर के अंतर्गत चार अलग-अलग प्रभाग बनाए जाएंगे. इनमें विनियमन, प्रत्यायन, शिक्षण मानक तय करना और अनुदान से जुड़े कार्य शामिल होंगे. प्रत्येक प्रभाग का काम स्पष्ट रूप से तय होगा, जिससे किसी एक संस्था के पास अत्यधिक शक्तियों के केंद्रीकरण की स्थिति खत्म करने का प्रयास किया गया है.

शिक्षा की गुणवत्ता पर फोकस

सरकार का दावा है कि नए ढांचे से शैक्षणिक गुणवत्ता और सीखने के परिणामों पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकेगा. नियमन और मान्यता की प्रक्रिया अलग होने से पारदर्शिता बढ़ेगी. अधिकारियों के मुताबिक इससे सरकारी और निजी संस्थानों के लिए समान गुणवत्ता मानक लागू करना आसान होगा.

विश्वविद्यालयों को मिलेगी राहत

सिंगल रेगुलेटर के समर्थकों का कहना है कि इससे विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति और शोध में ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी. अलग-अलग नियमों और निर्देशों से जूझने की समस्या कम होगी. साथ ही संस्थानों को अपने शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए ज्यादा जवाबदेह बनाया जा सकेगा.

पुराना विचार, नया रूप

एकीकृत नियामक का विचार नया नहीं है. वर्ष 2018 में भी इसका ड्राफ्ट तैयार हुआ था, लेकिन राज्यों के विरोध के चलते वह आगे नहीं बढ़ सका. अब सरकार ने इसे एनईपी 2020 के तहत नए स्वरूप में पेश किया है. उद्देश्य यही है कि उच्च शिक्षा को सरल, आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा सके.