दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने अपने बॉटनी विभाग में भारत का पहला कार्बन गार्डन (Carbon Garden) शुरू किया है. विश्वविद्यालय के मुताबिक इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्र में वायु और मिट्टी के प्रदूषण से निपटने के साथ जैव विविधता को बढ़ावा देना है.
DU के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने गुरुवार को गार्डन का उद्घाटन किया और इस मौके पर कल्पवृक्ष का पौधा लगाया. उन्होंने विश्वविद्यालय के दूसरे विभागों और कॉलेजों में भी ऐसे कार्बन गार्डन विकसित करने की जरूरत बताई.
बॉटनी विभाग के सामने करीब 2,000 वर्गफुट क्षेत्र में तैयार किए गए इस गार्डन में लगभग 50 प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं. इनमें जड़ी-बूटियां, झाड़ियां और पेड़ शामिल हैं. इसे छोटे जैव विविधता पार्क के रूप में भी विकसित किया गया है.
गार्डन में पौधों के अलावा शैवाल, फंगस और बैक्टीरिया जैसे विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव भी शामिल हैं. इसमें स्पिरुलिना भी मौजूद है. विश्वविद्यालय के अनुसार पेड़ों की छाल पर पाए जाने वाले कुछ सूक्ष्मजीव विभिन्न गैसों और प्रदूषकों को तोड़ने में भूमिका निभा सकते हैं.
विश्वविद्यालय के मुताबिक, कार्बन गार्डन की अवधारणा पौधों और सूक्ष्मजीवों की प्राकृतिक क्षमताओं का इस्तेमाल करने पर आधारित है. ये कार्बन डाइऑक्साइड और कुछ प्रदूषकों को अवशोषित करने में मदद कर सकते हैं. साथ ही गार्डन का उद्देश्य मिट्टी की गुणवत्ता और जैव विविधता को बेहतर करना भी है.
उद्घाटन समारोह में प्रोफेसर योगेश सिंह ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई. उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली ‘Pollution Capital’ बन सकती है. उन्होंने कहा कि इंसानी गतिविधियों से पैदा पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान केवल तकनीक से नहीं हो सकता.
VC ने जलवायु-संवेदनशील शहरी नियोजन पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि विकास योजनाएं भारत की पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए. दूसरे देशों में इस्तेमाल होने वाले भवन डिजाइन को बिना स्थानीय परिस्थितियों के विचार के अपनाना उचित नहीं है.
DU के मुताबिक यह कार्बन गार्डन दिखाता है कि घनी आबादी वाले शहर में अपेक्षाकृत छोटी हरित जगह भी पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के लिए उपयोगी हो सकती है. विश्वविद्यालय ने अपने विभागों और कॉलेजों को ऐसे गार्डन विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया है.