वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार का इस साल का रिपोर्ट कार्ड यानी आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश कर दिया है. विकास दर, महंगाई, नौकरियों और AI के खतरे पर सरकार ने आर्थिक सर्वे में क्या बताया है, 10 बिंदुओं में समझने की कोशिश करते हैं.
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 6.3-6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. सरकार का अनुमान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के 6.5 प्रतिशत के अनुरूप है, लेकिन विश्व बैंक द्वारा अनुमानित 6.7 प्रतिशत से कम है.
सरकार ने अगले कुछ महीनों में खाने-पीने की वस्तुओं के दाम काबू में रहने का अनुमान जताया है, लेकिन अगर-मगर के साथ. आर्थिक सर्वे का कहना है मौसमी सब्जियों और खरीफ फसल की आवक के साथ वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति नरम रहने की संभावना है. अच्छे रबी उत्पादन से वित्त वर्ष की पहली छमाही में खाद्य कीमतों पर लगाम लगने की संभावना है. हालांकि, प्रतिकूल मौसम की घटनाएं और अंतरराष्ट्रीय कृषि वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से खाद्य मुद्रास्फीति के लिए जोखिम पैदा होता है.
सरकार ने आर्थिक सर्वे में बताया है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 90 प्रतिशत विदेशी कर्ज को कवर करने और दस महीने से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार जनवरी, 2024 के अंत में 616.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर सितंबर, 2024 में 704.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया. हालांकि, 3 जनवरी 2025 को घटकर 634.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया.
वित्त वर्ष 2025 में FDI में सुधार दर्ज किया गया, जिसमें सकल FDI प्रवाह वित्त वर्ष 2024 के पहले आठ महीनों में 47.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 55.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 17.9 प्रतिशत ज्यादा है.
2024-25 के लिए जीएसटी कलेक्शन 11% बढ़कर 10.62 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. देश में इंफ्रास्ट्रक्चर पर खूब ज़ोर दिया गया है. रेलवे की बात करें तो इकॉनमिक सर्वे के मुताबकि अप्रैल से नवंबर 2024 के बीच 2031 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क शुरू किया गया. साथ ही अप्रैल से अक्टूबर 2024 के बीच 17 नई वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत हुई. इसके अलावा अगर सड़कों की बात की की जाए तो सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल-दिसंबर) में 5853 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण पूरा हुआ है.
आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि देश में 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है. 31 अक्टूबर, 2024 तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5G सेवाएं शुरू कर दी गई हैं. वर्तमान में, 783 जिलों में से 779 में 5G सेवाएं उपलब्ध हैं. देशभर में 4.6 लाख से ज़्यादा 5G बेस ट्रांसीवर स्टेशन (BTS) लगाए जा चुके हैं.
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत को 2030 तक सालाना 78.5 लाख नए गैर-कृषि रोजगार पैदा करने होंगे. देश में 26 प्रतिशत आबादी 10-14 साल की उम्र की है.
2047 में स्वतंत्रता की शताब्दी तक विकसित भारत बनने के लिए, भारत को लगभग दो दशक तक स्थिर कीमतों के साथ औसतन 8 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने की आवश्यकता है.
सर्वे में AI से नौकरियों पर पड़ने वाले खतरे की आशंका जताई गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, क्रिमिनल जस्टिस, बिजनेस और फाइनेंशियल सर्विसे सेक्ट AI की वजह से प्रभावित हो सकते हैं. AI इंसानों से बेहतर फैसले लेने लगा तो इन क्षेत्रों में मशीनों की भूमिका बढ़ेगी और कई लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं.
इकॉनमिक सर्वे में मानसिक स्वास्थ्य को एक आर्थिक मुद्दा माना गया है. सर्वे में कहा गया है कि न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की बढ़ती व्यापकता का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए क्या करना होगा?
आर्थिक सर्वेक्षण में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए लगभग दो दशकों तक स्थिर कीमतों के साथ औसतन 8 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने की आवश्यकता है. इसका मतलब है कि भारत को अपनी आर्थिक नीतियों और रणनीतियों को इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तैयार करना होगा.
यहां कुछ प्रमुख क्षेत्र हैं जिन पर भारत को ध्यान केंद्रित करना होगा:
उच्च और सतत आर्थिक विकास: भारत को अपनी जीडीपी विकास दर को लगातार 8 प्रतिशत के आसपास बनाए रखना होगा. इसके लिए निवेश में वृद्धि, बुनियादी ढांचे का विकास, और औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में उत्पादकता में सुधार करना होगा.
मुद्रास्फीति पर नियंत्रण: कीमतों को स्थिर रखना आवश्यक है ताकि आम आदमी की क्रय शक्ति बनी रहे और आर्थिक स्थिरता बनी रहे.
रोजगार सृजन: देश में बढ़ती बेरोजगारी को कम करने के लिए हर साल लाखों नए रोजगार पैदा करने होंगे. इसके लिए शिक्षा और कौशल विकास में निवेश करना होगा, और उद्योगों को बढ़ावा देना होगा.
मानसिक स्वास्थ्य: मानसिक स्वास्थ्य को एक महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए, इस क्षेत्र में निवेश करना होगा ताकि लोगों की उत्पादकता और भलाई में सुधार हो सके.
AI के खतरों से निपटना: AI के संभावित खतरों से निपटने के लिए नीतियां बनानी होंगी, ताकि नौकरियों पर इसके नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सके.
इन चुनौतियों का सामना करके और सही नीतियों का पालन करके, भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है.