menu-icon
India Daily

वॉल स्ट्रीट में अब कभी नहीं होगी रात, दिसंबर से 23 घंटे खुलेगा अमेरिकी शेयर बाजार

दिसंबर से वॉल स्ट्रीट पर रातभर शेयर ट्रेडिंग की शुरुआत होने जा रही है. नैस्डैक और एनवाईएसई जैसे प्रमुख अमेरिकी एक्सचेंज 23 घंटे ट्रेडिंग मॉडल लागू करेंगे, जिससे विदेशी निवेशकों को फायदा होगा.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
वॉल स्ट्रीट में अब कभी नहीं होगी रात, दिसंबर से 23 घंटे खुलेगा अमेरिकी शेयर बाजार
Courtesy: @RT_com

दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट पर दशकों से चली आ रही परंपरा बदलने जा रही है. अब तक अमेरिकी शेयर बाजारों में रोजाना काम का समय खत्म होने के बाद कई घंटों के लिए ट्रेडिंग पूरी तरह बंद रहती थी. लेकिन आगामी दिसंबर से बाजार रातभर खुला रहेगा और निवेशक लगभग 23 घंटे शेयर खरीद-बिक्री कर सकेंगे.

नैस्डैक (Nasdaq), एनवाईएसई अर्का (NYSE Arca), 24X नेशनल एक्सचेंज और सीबीओई ईडीजीएक्स (Cboe EDGX) जैसे दिग्गज एक्सचेंजों ने रात 9 बजे से सुबह 4 बजे (न्यूयोर्क समय) तक ओवरनाइट ट्रेडिंग सत्र शुरू करने की तैयारी कर ली है. यह नया समय नियमित ट्रेडिंग घंटों और प्री-मार्केट या पोस्ट-मार्केट से अलग होगा.

क्यों लिया गया 23 घंटे ट्रेडिंग का फैसला?

अमेरिकी एक्सचेंजों द्वारा यह बड़ा बदलाव करने के पीछे दो मुख्य वजहें हैं:

1. विदेशी निवेशकों की बढ़ती मांग: एशिया और यूरोप जैसे अलग-अलग टाइम जोन में बैठे निवेशक अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में भारी रुचि दिखा रहे हैं. रातभर बाजार खुला रहने से उन्हें अपने दिन के समय आसानी से ट्रेडिंग करने का मौका मिलेगा.

2. क्रिप्टो और प्रेडिक्शन मार्केट्स से मुकाबला: क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल मार्केट्स 24 घंटे काम करते हैं. पारंपरिक बाजारों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है.

आंकड़ों के मुताबिक, भले ही फिलहाल रात के समय होने वाली ट्रेडिंग का कुल वॉल्यूम में हिस्सा केवल 1% के आसपास है, लेकिन पिछले साल की तुलना में ओवरनाइट ट्रेडिंग में 358% की तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

संस्थागत निवेशक और विशेषज्ञ क्यों हैं सतर्क?

जहां आम और विदेशी खुदरा निवेशक इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, वहीं बड़े संस्थागत निवेशक (जैसे म्यूचुअल फंड और इन्वेस्टमेंट बैंक) थोड़े आशंकित हैं:

कम लिक्विडिटी (Liquidity) का जोखिम: रात के समय बाजार में खरीदारों और बिकवालों की संख्या कम हो सकती है, जिससे शेयर आसानी से और सही कीमत पर बेचना मुश्किल हो सकता है.
कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव (Volatility): खरीदार-विक्रेता के बीच बड़ा अंतर (Wide Bid-Ask Spread) होने की वजह से शेयरों की कीमतों में अचानक बड़ा उतार-चढ़ाव आ सकता है.
कर्मचारियों का स्वास्थ्य: चौबीसों घंटे काम करने के दबाव से ट्रेडर्स की मानसिक और शारीरिक सेहत प्रभावित होने की चिंता भी जताई जा रही है.

मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में केवल चुनिंदा लोकप्रिय और बड़ी कंपनियों (जैसे एप्पल, टेस्ला या एनवीडिया) के शेयरों में ही रात के समय ज्यादा ट्रेडिंग देखने को मिलेगी.

नई व्यवस्था कैसे काम करेगी?

दिसंबर से लागू होने वाली इस व्यवस्था में एक्सचेंजों को रात 8 बजे से 9 बजे के बीच एक घंटे के लिए बंद रखा जाएगा. इस एक घंटे के ब्रेक में तकनीकी रखरखाव, सिस्टम अपडेट और सौदों का सेटलमेंट (Clearing & Settlement) किया जाएगा. अमेरिका का प्रमुख क्लीयरिंग हाउस (DTCC) और डेटा प्रदाता एजेंसियां इस बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

संक्षेप में कहें तो, दिसंबर के बाद से अमेरिकी शेयर बाजार भी वैश्विक वित्तीय बाजारों की तरह लगभग नॉन-स्टॉप काम करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ा देगा.