केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट 1 फरवरी (रविवार) को लोकसभा में पेश करेगी. इससे पहले 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण संसद में रखा जाएगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करेंगी, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है.
यह केवल दूसरी बार होगा जब देश का आम बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा. इससे पहले साल 1999 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने रविवार को बजट पेश किया था.
बजट 2026 को लेकर आम लोगों की सबसे ज्यादा नजर इनकम टैक्स से जुड़े ऐलानों पर है. निवेशक और उद्यमी अमित बैद के मुताबिक, पिछले बजट ने पर्सनल टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव किया था. बजट 2025 में नई टैक्स व्यवस्था के तहत स्लैब बदले गए और रिबेट बढ़ाई गई, जिससे 12 लाख रुपये तक की आय और सैलरी पाने वालों के लिए 12.75 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री हो गई थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सरकार बड़े टैक्स कटौती के ऐलान से बच सकती है. पहले ही टैक्स और जीएसटी में राहत दी जा चुकी है, इसलिए बजट 2026 में केवल छोटे बदलाव संभव हैं. महंगाई को देखते हुए स्टैंडर्ड डिडक्शन में हल्की बढ़ोतरी या पुराने टैक्स सिस्टम की कुछ छूटों की समीक्षा की जा सकती है.
इस बजट से बीमा सेक्टर को भी बड़ी उम्मीदें हैं. इंडस्ट्री अब सिर्फ टैक्स छूट या ज्यादा बजट आवंटन नहीं, बल्कि लंबे समय के संरचनात्मक सुधार चाहती है. लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस और एमएसएमई से जुड़े बीमा प्रोडक्ट्स की पहुंच बढ़ाने पर जोर है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार बीमा को आम लोगों और छोटे कारोबार तक सस्ता और आसान बनाए, तो इसका बड़ा असर दिख सकता है. बीमापे फिनश्योर के सीईओ हनुत मेहता के अनुसार, बजट 2026 बीमा प्रीमियम फाइनेंसिंग के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.
कुल मिलाकर, बजट 2026 से बहुत बड़े चौंकाने वाले ऐलानों की उम्मीद कम है, लेकिन यह बजट देश की आर्थिक दिशा, टैक्स प्लानिंग और बीमा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है.