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उज्जवला योजना की सब्सिडी में हुई कटौती, अब साल में केवल 4 बार भरा सेकेंगे सिलेंडर

सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या नौ से घटाकर चार कर दी है. अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी को इस फैसले की मुख्य वजह बताया गया है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
उज्जवला योजना की सब्सिडी में हुई कटौती, अब साल में केवल 4 बार भरा सेकेंगे सिलेंडर
Courtesy: pinterest

देशभर के करोड़ों परिवारों से जुड़ी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. केंद्र सरकार ने योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या कम करने का फैसला लिया है. यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. सरकार का कहना है कि बढ़ती लागत और तेल विपणन कंपनियों पर बढ़ रहे वित्तीय दबाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.

अब साल भर में मिलेंगे केवल चार सिलेंडर

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को साल में केवल पहले चार सिलेंडरों पर ही अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी. प्रत्येक सिलेंडर पर 300 रुपये की सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाएगी. अब तक योजना के तहत साल में 9 सिलोंडरों पर सब्सिडी मिलती थी. सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है और यह सहायता आगे भी जारी रहेगी. हालांकि अब लाभ सीमित संख्या तक रहेगा. इस बदलाव का असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जो सालभर में अधिक गैस सिलेंडरों का उपयोग करते हैं.

बढ़ती वैश्विक कीमतों का असर

सरकार ने इस फैसले के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को प्रमुख कारण बताया है. अधिकारियों के अनुसार एलपीजी की वास्तविक लागत लगातार बढ़ रही है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के कारण वैश्विक बाजार में गैस के दाम तेजी से ऊपर गए हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एलपीजी का अंतरराष्ट्रीय मानक मूल्य कुछ महीनों के भीतर काफी बढ़ गया है. इसका सीधा असर भारत में गैस आयात की लागत पर पड़ा है. सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को अभी भी वास्तविक लागत से कम कीमत पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है.

कंपनियों पर बढ़ा वित्तीय दबाव

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि घरेलू गैस की आपूर्ति करने वाली सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से लागत और बिक्री मूल्य के बीच अंतर का बोझ उठा रही हैं. सरकार के मुताबिक एक घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जा रही कीमत से काफी अधिक है. इस अंतर को पूरा करने के लिए कंपनियों को भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है. आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि घरेलू एलपीजी पर होने वाली कुल वित्तीय कमी पिछले वित्त वर्ष में काफी बढ़ गई. इसी वजह से सरकार को कंपनियों के लिए विशेष वित्तीय सहायता की व्यवस्था करनी पड़ी है.

लाखों परिवारों पर पड़ेगा असर

उज्ज्वला योजना के तहत देश में करोड़ों गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में परिवार इस योजना का लाभ उठा रहे हैं. नई व्यवस्था के बाद लाभार्थियों को पहले चार सिलेंडरों पर अतिरिक्त सहायता मिलेगी, जबकि उसके बाद सामान्य दर लागू होगी. सरकार का कहना है कि इसके बावजूद उज्ज्वला उपभोक्ताओं को पर्याप्त राहत मिलती रहेगी. वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ऊर्जा कीमतों के दौर में यह फैसला परिवारों के घरेलू बजट को प्रभावित कर सकता है. आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और सरकार की नीति पर सभी की नजर बनी रहेगी.