मुंबई: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली और दोनों मुख्य इंडेक्स यानी सेंसेक्स और निफ्टी 1% से ज्यादा टूटकर बंद हुए. हालांकि इस कमजोरी के बावजूद बाजार विशेषज्ञ अनिल सिंघवी ने निवेशकों को न घबराने की सलाह दी है. उनका कहना है कि बाजार के जरूरी सपोर्ट लेवल अभी भी सुरक्षित हैं और मार्केट का ढांचा मजबूत है.
इस गिरावट के बाद बीएसई सेंसेक्स 719 अंक गिरकर 73524 पर और निफ्टी 50 करीब 244 अंक फिसलकर 23,123 के स्तर पर बंद हुआ. बाजार के टूटने की मुख्य वजह कमजोर वैश्विक संकेत दुनिया भर में बढ़ता तनाव और कई सेक्टरों में आई बिकवाली रही.
मुनाफा कमाने वाले- आज सबसे ज्यादा तेजी 'मैक्स हेल्थकेयर' में रही जो करीब 3% तक चढ़ा. इसके अलावा पावर ग्रिड, भारती एयरटेल, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, नेस्ले इंडिया, टेक महिंद्रा, सन फार्मा, अपोलो हॉस्पिटल्स और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयर भी बढ़त के साथ हरे निशान पर बंद हुए.
नुकसान उठाने वाले: 'विप्रो' आज का सबसे बड़ा फिसड्डी साबित हुआ और इसमें 8% से ज्यादा की गिरावट आई. जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, हिंडाल्को, श्रीराम फाइनेंस और इटर्नल के शेयरों को भी भारी नुकसान हुआ. रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस और अडानी एंटरप्राइजेस जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर भी लाल निशान पर बंद हुए.
आज बाजार की मंदी का असर लगभग सभी सेक्टरों पर दिखा. सबसे खराब प्रदर्शन रियल्टी और मेटल सेक्टर का रहा. इसके अलावा ऑटो, केमिकल, मीडिया और ऑयल एंड गैस सेक्टर भी घाटे में रहे.
आईटी और बैंकिंग शेयरों पर भी अच्छा-खासा दबाव देखा गया. इस चौतरफा मंदी के बीच सिर्फ हेल्थकेयर सेक्टर ही ऐसा था, जो थोड़ी बढ़त बनाने में कामयाब रहा. छोटे और मझोले शेयरों में भी गिरावट रही जिससे साफ है कि निवेशक आज फूंक-फूंक कर कदम रख रहे थे.
निफ्टी- निफ्टी के लिए 23,150 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट है. आज बाजार इस स्तर तक गिरा लेकिन वहां से वापस सुधरा जो एक अच्छा संकेत है. अगर निफ्टी 23,125 से नीचे बंद होता है तो थोड़ी और कमजोरी आ सकती है.
बैंक निफ्टी- इसके लिए 53,650 से 53,850 का दायरा मजबूत सपोर्ट है. अगर यह 53,700 से नीचे बंद होता है तो दबाव बढ़ेगा लेकिन जब तक यह 52,800 के ऊपर है तब तक बाजार का बड़ा ट्रेंड पॉजिटिव ही रहेगा.
एक्सपर्ट का यह भी मानना है कि इस माहौल में बैंक निफ्टी का प्रदर्शन निफ्टी से बेहतर रह सकता है क्योंकि गिरावट में बैंकिंग शेयर कम टूटेंगे और बाजार सुधरने पर तेजी से रिकवर करेंगे.
क्रैश की अफवाहों से बचें- अनिल सिंघवी ने कहा कि बाजार में किसी बड़े क्रैश या संकट के डर में न आएं. बाजार में ऐसे उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और हर गिरावट कोई बड़ा संकट नहीं होती.
मिड और स्मॉल कैप में जल्दबाजी न करें- छोटे और मझोले शेयरों में अभी 'देखो और इंतजार करो' की नीति अपनाएं. जब तक वैश्विक हालात साफ नहीं हो जाते आक्रामक होकर खरीदारी करने से बचें.
वैश्विक तनाव पर नजर- ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव चिंता का विषय जरूर है लेकिन अमेरिका इस विवाद को बढ़ने से रोकने की कोशिश में है. जब तक स्थिति बहुत ज्यादा नहीं बिगड़ती, भारतीय बाजारों पर कोई बहुत बड़ा खतरा नहीं है. निवेशकों के लिए फिलहाल यही सलाह है कि वे शांत रहें, जल्दबाजी में कोई भावुक फैसला न लें, सपोर्ट लेवल पर ध्यान दें और बाजार के संभलने का इंतजार करें.