जोहो के संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बू ने आधुनिक आर्थिक सोच पर बड़े सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि केवल मुनाफे के पीछे भागने वाली दुनिया एक भयावय (मनहूस) दुनिया का रूप ले लेती है. वेम्बू के अनुसार, बाजार जिस नींव पर टिका है, वह आर्थिक ताकतों से नहीं बल्कि सभ्यता, अध्यात्म और संस्कृति से बनती है.
वेम्बू ने सवाल किया कि क्या किसानों, शिक्षकों, डॉक्टरों और पुजारियों को भी केवल पैसे कमाने के बारे में सोचना चाहिए? उन्होंने जोर देकर कहा कि लाभ कमाने का असली मकसद प्रकृति, शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को बनाए रखना होना चाहिए. तकनीक को वे केवल एक माध्यम मानते हैं, जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं.
Do we want our farmers, teachers, doctors and priests to be profit-driven?
— Sridhar Vembu (@svembu) August 30, 2026
Modern finance and economic theory encourages essentially all human activity to be profit-driven. This leads to a dystopian world.
The "market" that currently fashionable schools of economics like to…
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के वरिष्ठ प्रबंधक अरिंदम बनर्जी ने वेम्बू के विचारों का समर्थन तो किया, लेकिन इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण बताया. उनके मुताबिक, अमेरिका की अगुवाई वाली आधुनिक आर्थिक प्रणाली ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जिसे पूरी दुनिया ने अपना लिया है.
वेम्बू की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने टेक कंपनियों की मंशा पर सवाल उठाए. यूजर ने लिखा कि आज की प्रमुख कंपनियां ऐसे उत्पाद बना रही हैं जो लोगों को स्क्रीन का आदी बनाते हैं, क्योंकि लत के इस कारोबार में सबसे ज्यादा मुनाफा है.