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India Daily

जोहो के श्रीधर वेम्बू ने मुनाफा-केंद्रित अर्थव्यवस्था को बताया 'खतरनाक', जानें पूरा मामला

जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने केवल मुनाफे पर चलने वाली अर्थव्यवस्था को खतरनाक बताया है. उनका मानना है कि तकनीक और व्यापार का असली मकसद समाज, संस्कृति और प्रकृति को संवारना होना चाहिए.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
जोहो के श्रीधर वेम्बू ने मुनाफा-केंद्रित अर्थव्यवस्था को बताया 'खतरनाक', जानें पूरा मामला
Courtesy: X

जोहो के संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बू ने आधुनिक आर्थिक सोच पर बड़े सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि केवल मुनाफे के पीछे भागने वाली दुनिया एक भयावय (मनहूस) दुनिया का रूप ले लेती है. वेम्बू के अनुसार, बाजार जिस नींव पर टिका है, वह आर्थिक ताकतों से नहीं बल्कि सभ्यता, अध्यात्म और संस्कृति से बनती है.

बाजार की नींव और असली मकसद

वेम्बू ने सवाल किया कि क्या किसानों, शिक्षकों, डॉक्टरों और पुजारियों को भी केवल पैसे कमाने के बारे में सोचना चाहिए? उन्होंने जोर देकर कहा कि लाभ कमाने का असली मकसद प्रकृति, शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को बनाए रखना होना चाहिए. तकनीक को वे केवल एक माध्यम मानते हैं, जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं.

वैश्विक व्यवस्था और चुनौतियां

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के वरिष्ठ प्रबंधक अरिंदम बनर्जी ने वेम्बू के विचारों का समर्थन तो किया, लेकिन इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण बताया. उनके मुताबिक, अमेरिका की अगुवाई वाली आधुनिक आर्थिक प्रणाली ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जिसे पूरी दुनिया ने अपना लिया है.

तकनीक और स्क्रीन की लत

वेम्बू की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने टेक कंपनियों की मंशा पर सवाल उठाए. यूजर ने लिखा कि आज की प्रमुख कंपनियां ऐसे उत्पाद बना रही हैं जो लोगों को स्क्रीन का आदी बनाते हैं, क्योंकि लत के इस कारोबार में सबसे ज्यादा मुनाफा है.