मुंबई: जो लोग पहली बार निवेश करने जा रहे हैं उनके मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि उन्हें एक साथ सारा पैसा लगा देना चाहिए या फिर धीरे-धीरे थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करना चाहिए. चार्टर्ड अकाउंटेंट के मुताबिक नए निवेशकों के लिए SIP एक बेहतर विकल्प है क्योंकि यह जोखिम को कम करता है और बाजार के उतार-चढ़ाव को झेलना आसान बनाता है.
सीए ने समझाया कि बाजार में एक साथ बड़ा पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है खासकर नए लोगों के लिए. शेयर बाजार का मिजाज समझना मुश्किल होता है और आर्थिक संकट या वैश्विक तनाव जैसी किसी भी अनहोनी से बाजार अचानक गिर सकता है.
इसे एक उदाहरण से समझते हैं अगर किसी ने किसी म्यूचुअल फंड में एक साथ 1 लाख रुपये लगा दिए और उसके तुरंत बाद बाजार 30% गिर गया तो उस निवेश की कीमत घटकर करीब 70 हजार रह जाएगी. यानी सीधे तौर पर 30 हजार रुपये का नुकसान दिखेगा. शुरुआती दौर में ऐसा बड़ा घाटा किसी भी नए निवेशक को तनाव में डाल सकता है और उसका हौसला तोड़ सकता है.
SIP का तरीका बिल्कुल अलग है. इसमें एक साथ सारा पैसा फंसाने के बजाय हर महीने एक तय रकम निवेश की जाती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है.
कम कीमत पर ज्यादा फायदा- जब बाजार गिरता है और म्यूचुअल फंड की कीमतें कम होती हैं तो उतने ही पैसों में आपको ज्यादा यूनिट्स मिल जाती हैं
एवरेजिंग का लाभ- जब बाजार तेज होता है तो कम यूनिट्स मिलती हैं और मंदी में ज्यादा. इस तरह समय के साथ आपकी खरीद की औसत लागत बैलेंस हो जाती है.
बाजार की गिरावट में कमाई का मौका- मान लीजिए आज किसी म्यूचुअल फंड की एक यूनिट 10 रुपये की है और बाजार गिरने पर वह सस्ती हो जाती है तो SIP के जरिए आप कम दाम में ज्यादा यूनिट्स जमा कर लेते हैं. आगे चलकर जब बाजार सुधरेगा और वही यूनिट 15 रुपये की होगी तो आपको उन ज्यादा यूनिट्स पर तगड़ा मुनाफा मिलेगा.
वित्तीय अनुशासन- SIP से हर महीने बचत और निवेश करने की एक अच्छी आदत पड़ती है. आपको बाजार के बढ़ने या घटने का इंतजार नहीं करना पड़ता.
इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, सीए नए निवेशकों को SIP से ही शुरुआत करने की सलाह देते हैं. यह बाजार के उतार-चढ़ाव के असर को कम करता है गलत समय पर पैसा लगाने के जोखिम से बचाता है और लंबी अवधि के लिए निवेश का बेहतरीन जरिया है. पहली बार कदम रख रहे लोगों के लिए SIP एक सुरक्षित और व्यावहारिक रास्ता है.