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India Daily

खाने के तेल की पैकिंग के नियम बदले, अब नहीं होगी कीमतों में हेरफेर; सरकार का बड़ा फैसला

उपभोक्ता मामलों के विभाग के नए नियम के तहत अब खाने का तेल सिर्फ 9 तय स्टैंडर्ड साइज के पैकेट में ही बेचा जा सकेगा. इससे बाजार में पारदर्शिता आएगी और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों की तुलना करना आसान होगा.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
खाने के तेल की पैकिंग के नियम बदले, अब नहीं होगी कीमतों में हेरफेर; सरकार का बड़ा फैसला
Courtesy: ai generated

उपभोक्ता मामलों के विभाग ने ग्राहकों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है. अब बाजार में मिलने वाले खाने के तेल के पैकेट और बोतलों के साइज तय कर दिए गए हैं ताकि लोग आसानी से अलग-अलग ब्रांड्स के तेल की कीमतों की तुलना कर सकें और सही चुनाव कर पाएं. लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क के तहत जारी यह नया नियम देश में बनने वाले और बाहर से आने वाले दोनों तरह के तेलों पर लागू होगा.

अब सिर्फ इन 9 साइज में मिलेगा तेल

नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब सरसों, सूरजमुखी, सोयाबीन, पाम ऑयल, मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, कॉटनसीड, कॉर्न और ब्लेंडेड ऑयल जैसे सभी मुख्य कुकिंग ऑयल सिर्फ इन 9 तय साइज में ही बेचे जा सकेंगे.

200 मिलीलीटर/ग्राम

500 मिलीलीटर/ग्राम

1 लीटर/किलोग्राम

2 लीटर/किलोग्राम

3 लीटर/किलोग्राम

4 लीटर/किलोग्राम

5 लीटर/किलोग्राम

15 लीटर/किलोग्राम

20 लीटर/किलोग्राम

वजन लिखना भी हुआ जरूरी

नए नियमों के तहत एक और बड़ा बदलाव किया गया है. अगर किसी तेल के पैकेट पर उसकी मात्रा लीटर या मिलीलीटर में लिखी है तो कंपनी को उसके साथ उसका बराबर वजन किलोग्राम या ग्राम में भी साफ-साफ लिखना होगा. यह जानकारी लीगल मेट्रोलॉजी नियम 2011 के अनुसार देनी होगी.

किन्हें मिली है छूट?

छोटे उपभोक्ताओं की जेब का ध्यान रखते हुए सरकार ने 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से छोटे पैकेटों को इस नियम से बाहर रखा है. इसके अलावा कुछ कम इस्तेमाल होने वाले छोटे-मोटे तेलों को भी इस दायरे से छूट दी गई है ताकि बाजार में कम कीमत वाले छोटे पैकेट के विकल्प हमेशा बने रहें.

कंपनियों को मिला 3 महीने का समय

सरकार ने तेल बनाने वाली, इंपोर्ट करने वाली और पैकेजिंग कंपनियों को नए नियमों में ढलने के लिए 3 महीने का समय दिया है. हालांकि जो कंपनियां चाहें वे इस नियम को तुरंत भी लागू कर सकती हैं. यह फैसला तेल उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों के साथ बातचीत के बाद लिया गया है. उद्योग जगत ने भी इस कदम का स्वागत किया है. अधिकारियों का मानना है कि इस फैसले से बाजार में तरह-तरह के अजीब साइज के पैकेटों से होने वाला कन्फ्यूजन खत्म होगा, ग्राहकों के लिए खरीदारी आसान होगी और कंपनियों के बीच भी सही मुकाबला देखने को मिलेगा.