मुंबई: 22 जनवरी को भारतीय शेयर बाजार ने उतार-चढ़ाव से भरा कारोबार देखा. शुरुआती सत्र में वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी तेजी आई, लेकिन दोपहर होते-होते तस्वीर बदल गई. दिन के उच्चतम स्तर से सेंसेक्स करीब 800 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 25,200 के नीचे फिसल गया. निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी और मुनाफावसूली हावी हो गई.
पिछले तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद बाजार में आई तेज रिकवरी ने निवेशकों को मुनाफा बुक करने का मौका दिया. जैसे ही निफ्टी 25,250–25,300 के रेजिस्टेंस जोन के करीब पहुंचा, बिकवाली तेज हो गई. बैंक निफ्टी भी दिन के उच्च स्तर से करीब 1 प्रतिशत फिसला. बड़े बैंकिंग शेयरों में हल्की कमजोरी ने तेजी पर ब्रेक लगा दिया.
विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बनाए हुए है. 21 जनवरी को एफआईआई ने करीब 1,788 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी कर कुछ हद तक संतुलन बनाया, लेकिन एफआईआई आउटफ्लो का असर बना रहा. विशेषज्ञों के मुताबिक, कमजोर आय वृद्धि और ऊंचे वैल्यूएशन विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं.
इंडिया वीआईएक्स में करीब 4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जो बाजार में बढ़ते तनाव का संकेत है. अस्थिरता बढ़ने से इंट्राडे उतार-चढ़ाव तेज हुआ और निवेशक सतर्क हो गए. एडवांस-डिक्लाइन रेशियो कमजोर रहा, जिससे यह साफ हुआ कि बाजार की चौड़ाई भी दबाव में है. ऐसे माहौल में जोखिम लेने की क्षमता घटती दिखी.
निफ्टी मिडकैप इंडेक्स दिन के उच्च स्तर से 1.26 प्रतिशत फिसल गया. निफ्टी रियल्टी सबसे कमजोर सेक्टर रहा. एसबीआई लाइफ, हिंडाल्को और मैक्स हेल्थकेयर जैसे शेयरों में गिरावट दिखी. हिंदुस्तान जिंक में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जिसका असर व्यापक बाजार भावना पर भी पड़ा.
22 जनवरी को सेंसेक्स का साप्ताहिक एफएंडओ एक्सपायरी भी बाजार की अस्थिरता बढ़ाने वाला कारक रहा. तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि जब तक निफ्टी 25,500 के ऊपर मजबूती से नहीं टिकता, तब तक बिकवाली का दबाव बना रह सकता है. ओवरसोल्ड स्थिति के चलते छोटी राहत रैली संभव है, लेकिन निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं.