मुंबई: शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिली. ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही रॉकेट की रफ्तार से ऊपर भागे. बाजार में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होना कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और दुनिया भर के बाजारों में आई मजबूती रही.
दोपहर के आसपास सेंसेक्स करीब 850 अंकों की छलांग लगाकर 74,685 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था जबकि निफ्टी भी 23,350 के पार निकल गया. खास बात यह रही कि बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली. चाहे बड़ी कंपनियां हों या मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स हर तरफ निवेशकों में उत्साह था.
बाजार के इस तरह झूमने के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदें हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि दोनों देशों के बीच बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है और जल्द ही कोई डील फाइनल हो सकती है. इस खबर से मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा टल गय जिससे दुनिया भर के निवेशकों ने राहत की सांस ली.
दूसरा बड़ा बूस्टर कच्चे तेल की कीमतों का घटना रहा. ब्रेंट क्रूड गिरकर 89 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है इसलिए तेल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी खुशखबरी है. इससे देश का आयात खर्च घटेगा रुपये को मजबूती मिलेगी और एविएशन , ट्रांसपोर्ट, पेंट, टायर और सीमेंट जैसी कंपनियों की लागत कम होगी.
इस तेजी का फायदा सीधे तौर पर बीपीसीएल (BPCL), एचपीसीएल (HPCL) और इंडियन ऑयल जैसी सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों को मिला. वहीं हवाई ईंधन सस्ता होने की उम्मीद में इंडिगो (IndiGo) के शेयर भी चढ़ गए. इसके अलावा पश्चिम एशिया में हालात सुधरने की उम्मीद से इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में भी अच्छी बढ़त देखी गई.
वैश्विक मोर्चे पर भी माहौल पूरी तरह पॉजिटिव था. जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और हॉन्गकॉन्ग समेत एशिया के तमाम बड़े बाजारों में तेजी रही. वहीं अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे. कच्चे तेल के दाम गिरने से डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ है. इसके अलावा बाजार में डर को मापने वाला 'इंडिया विक्स' इंडेक्स तेजी से नीचे गिरा जो यह दिखाता है कि निवेशकों का डर अब काफी हद तक कम हो चुका है.