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कच्चा तेल 10% टूटा, फिर भी पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं हुआ सस्ता? जानिए आपकी जेब को कब मिलेगी राहत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन देश में 27 जून को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ.

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Reepu Kumari

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट ने लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं. ऐसे में वाहन चालकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अब पेट्रोल और डीजल के दाम भी कम होंगे. फिलहाल नई कीमतों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. 27 जून के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के ताजा रेट जारी कर दिए हैं. हालांकि वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता हुआ है, लेकिन देश के प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें पहले जैसी ही बनी हुई हैं. इसके पीछे की वजह भी अब सामने आ गई है.

आज भी नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम

सरकारी तेल कंपनियों ने 27 जून के लिए जारी नई दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. पिछले करीब एक महीने से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. इसके बाद से देशभर में पुराने रेट ही लागू हैं.

इन शहरों में आज क्या हैं ईंधन के रेट

दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है. चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये है. कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. नोएडा, लखनऊ, चंडीगढ़ और पटना में भी पुराने रेट ही लागू हैं.


कच्चा तेल सस्ता होने की क्या है वजह

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 3.84 प्रतिशत गिरकर 72.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 69.23 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. सप्ताहभर में ब्रेंट में लगभग 10.86 प्रतिशत और डब्ल्यूटीआई में 9.62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और 60 दिन के सीजफायर पर सहमति बनने से सप्लाई को लेकर चिंता घटी है.

फिर भी क्यों नहीं मिली राहत

कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत नहीं घटते. भारत में तेल कंपनियां कीमत तय करते समय पिछले 15 दिन या एक महीने की औसत लागत को आधार बनाती हैं. इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई ताजा गिरावट का असर अभी खुदरा ईंधन कीमतों पर दिखाई नहीं दिया है. यदि क्रूड ऑयल लंबे समय तक सस्ता रहता है तो आगे राहत मिलने की संभावना बन सकती है.

आगे क्या है उम्मीद

जानकारों का कहना है कि फिलहाल तेल कंपनियां पेट्रोल पर अच्छा मार्जिन कमा रही हैं, जबकि डीजल पर हल्का नुकसान बना हुआ है. भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में यदि वैश्विक बाजार में कीमतें लंबे समय तक नीचे रहती हैं तो आयात बिल कम होगा, महंगाई पर दबाव घटेगा और भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है.