US Israel Iran War

इजरायल-लेबनान ने वाशिंगटन में शांति समझौते की रूपरेखा पर किए साइन, हिजबुल्ला संघर्ष खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम

इजरायल और लेबनान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. शुक्रवार को वाशिंगटन में दोनों देशों ने शांति समझौते की रूपरेखा पर हस्ताक्षर कर दिए.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: इजरायल और लेबनान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. शुक्रवार को वाशिंगटन में दोनों देशों ने शांति समझौते की रूपरेखा पर हस्ताक्षर कर दिए. अमेरिका की मध्यस्थता में कई दिनों की बातचीत के बाद यह समझौता हुआ है. लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह मोवाद और इजरायल के राजदूत येचियल लाइटर ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय में इस त्रिपक्षीय दस्तावेज पर दस्तखत किए. 

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि यह एक मुश्किल लेकिन जरूरी सफर की शुरुआत है. लाइटर ने लेबनानी राजदूत की तारीफ की. हमादेह ने कहा कि यह समझौता लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को मजबूत करने, लड़ाई को हमेशा के लिए खत्म करने और लेबनानी लोगों को शांति- सुरक्षा देने की दिशा में पहला कदम है.

नेतन्याहू का बयान:

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की कि हिजबुल्ला के पूरी तरह निरस्त्रीकरण (हथियार छुड़ाने) तक इजरायल दक्षिणी लेबनान में अपनी सेना बनाए रखेगा. उन्होंने कहा कि इजरायली सेना लेबनानी सेना को दो क्षेत्रों में नियंत्रण रखने की अनुमति देगी, एक लिटानी नदी के दक्षिण में और दूसरा इसके उत्तर में.


संघर्ष को खत्म करने की दिशा में पहला बड़ा कदम:

यह समझौता इजरायल और हिजबुल्ला के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है. दोनों पक्षों ने इसे शांति की ओर बढ़ाया गया कदम बताया है. हालांकि, समझौते की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं और यह 16 अप्रैल के संघर्ष विराम समझौते से कैसे अलग होगा, इसकी जानकारी नहीं दी गई.

इजरायल और हिजबुल्ला के बीच पिछले कई महीनों से तनाव बना हुआ था. कई दौर की बातचीत के बाद अमेरिका की मध्यस्थता में यह ढांचागत समझौता हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता सफल रहा तो पूरे मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीद जगेगी. अभी दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी बनी हुई है, इसलिए आने वाले दिनों में इस समझौते को अमल में लाने की चुनौती रहेगी.