किसी म्यूचुअल फंड का रिटर्न दूसरी योजनाओं से कम दिखे तो निवेशक अक्सर उसे बदलने के बारे में सोचने लगते हैं. लेकिन सिर्फ एक साल के प्रदर्शन के आधार पर फैसला लेना सही नहीं हो सकता. विशेषज्ञों के मुताबिक, फंड की लंबी अवधि की निरंतरता, रणनीति और निवेशक के लक्ष्य से उसकी उपयुक्तता देखना जरूरी है.
आनंद राठी वेल्थ के डायरेक्टर चिराग मुनी के मुताबिक, निवेशक अक्सर हालिया रिटर्न देखकर फैसला लेने की गलती करते हैं. इसे ‘रिकेंसी बायस’ कहा जाता है. इक्विटी फंड को परखने के लिए तीन से पांच साल का प्रदर्शन देखना ज्यादा उपयोगी है. फंड की तुलना उसके बेंचमार्क और उसी श्रेणी की दूसरी योजनाओं से भी करनी चाहिए. उन्होंने क्वांट लार्ज कैप फंड का उदाहरण दिया, जो 2023 और 2024 में बेहतर प्रदर्शन करने वालों में था, लेकिन 2025 में 35 योजनाओं में सबसे नीचे पहुंच गया. 2026 में यह फिर दूसरे स्थान पर आ गया.
वेल्दी.इन के को-फाउंडर आदित्य अग्रवाल कहते हैं कि यह देखना जरूरी है कि फंड की कमजोरी उसकी निवेश शैली के कारण है या वह समान रणनीति वाले दूसरे फंडों से भी पीछे है. तीन से पांच साल तक लगातार बेंचमार्क और श्रेणी के औसत से कमजोर प्रदर्शन हो तो फंड मैनेजर, निवेश रणनीति और पोर्टफोलियो में हुए बदलावों की जांच करनी चाहिए. हालांकि, फंड बदलने की वजह हमेशा उसका खराब होना नहीं होती. निवेशक का लक्ष्य, जोखिम क्षमता या मौजूदा पोर्टफोलियो में ओवरलैप भी फैसला बदल सकता है.
कमजोर फंड छोड़ने का फैसला हो जाए तो सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली मौजूदा योजना चुनना भी सही रणनीति नहीं है. चिराग मुनी के अनुसार, 2024 में मोतीलाल ओसवाल मिडकैप फंड अपनी श्रेणी में शीर्ष पर था और उसने 57 प्रतिशत से ज्यादा रिटर्न दिया, लेकिन 2025 में यह निचले पायदान पर पहुंच गया और रिटर्न नकारात्मक रहा. इसलिए नए फंड का चयन करते समय लंबी अवधि की निरंतरता, रणनीति, जोखिम, पोर्टफोलियो की एकाग्रता और मौजूदा निवेश से ओवरलैप देखना चाहिए.
अगर किसी फंड पर भरोसा कम हो गया है, तो मौजूदा निवेश को तुरंत बेचने के बजाय नई SIP रोककर भविष्य का पैसा दूसरी योजना में लगाया जा सकता है. कार्मिका वेल्थ मेंटर्स की डायरेक्टर किरंग गांधी के अनुसार, यह तरीका तब उपयोगी हो सकता है जब फंड की रणनीति अभी भी निवेशक के लक्ष्य के अनुकूल हो. हालांकि, पुराने निवेश को बेचने पर टैक्स और एग्जिट लोड लग सकता है. स्टॉकटिक कैपिटल के संस्थापक विजय माहेश्वरी के मुताबिक, लगातार खराब प्रदर्शन, रणनीति या फंड मैनेजर में बड़ा बदलाव, ज्यादा जोखिम और अत्यधिक ओवरलैप होने पर रिडेम्पशन पर विचार किया जा सकता है.
हालांकि एक ही AMC की दूसरी योजना में स्विच करने से टैक्स अपने आप नहीं बचता. स्विच-आउट को रिडेम्पशन और स्विच-इन को नया निवेश माना जाता है. इसलिए स्विच करने से पहले टैक्स, एग्जिट लोड और निवेश के उद्देश्य को जरूर देखें.
नोट: म्यूचुअल फंड और निवेश से जुड़े फैसले बाजार जोखिमों के अधीन हैं. विशेषज्ञों की राय को निवेश सलाह न मानें. निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह लें.