नई दिल्ली: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है. पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर और WTI 94 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. अब गोल्डमैन सैक्स की 120 डॉलर की चेतावनी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है.
अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों पर हमले नहीं रुकते हैं, तो कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. कमोडिटीज रिसर्च के को-हेड डान स्ट्रुवेन ने यह संभावना जताई है. उनके अनुसार, पिछले कुछ दिनों में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल आपूर्ति को लेकर जोखिम बढ़ा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की आवाजाही होती है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में दिखाई दे रहा है. 9 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड लगभग 94 डॉलर पर कारोबार कर रहा था. दोनों बेंचमार्क में 2 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई. अगर आपूर्ति में रुकावट लंबी खिंचती है, तो कीमतों पर आगे भी दबाव बने रहने की आशंका है.
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल भारत के लिए कई मोर्चों पर चुनौती पैदा कर सकता है. तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ेगा और परिवहन तथा लॉजिस्टिक्स की लागत भी ऊपर जा सकती है. इसके अलावा उद्योगों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ने का असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंच सकता है. इससे महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा होगा और रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है.
महंगाई में तेज बढ़ोतरी का असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है. यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो कई कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी. इसका असर निवेशकों के भरोसे पर भी पड़ सकता है और शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ सकती है. इससे बाजार में बड़ी गिरावट का जोखिम बढ़ेगा. इससे पहले 30 अप्रैल को कच्चा तेल 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका था और अब एक बार फिर कीमतों में तेजी लौटती दिख रही है.