ITR में दिख रहा था Refund, फिर खाते में क्यों नहीं आया? समझिए पूरा खेल

आईटीआर दाखिल करने के बाद भी रिफंड तुरंत मिलना तय नहीं होता. यदि पुराने वर्षों का टैक्स बकाया दर्ज है तो आयकर विभाग धारा 245 के तहत रिफंड समायोजित कर सकता है. समय पर जवाब देना जरूरी है.

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Kuldeep Sharma

आईटीआर दाखिल करने के बाद कई करदाता अपने रिफंड का इंतजार करते हैं, लेकिन कई बार खाते में रकम आने से पहले ही उसमें कटौती हो जाती है. इसकी सबसे बड़ी वजह पुराने टैक्स बकाये का समायोजन है. ऐसे मामलों में आयकर विभाग नोटिस भेजकर करदाता को जवाब देने का अवसर भी देता है.

पुराने बकाये से क्यों कट जाता है रिफंड?

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए रिटर्न दाखिल होने के बाद आयकर विभाग सभी दावों की जांच कर रहा है. इस दौरान यदि किसी करदाता के पिछले किसी असेसमेंट ईयर का टैक्स बकाया रिकॉर्ड में मिलता है तो आयकर अधिनियम की धारा 245 के तहत मौजूदा रिफंड को उसी बकाये से समायोजित किया जा सकता है. कई मामलों में यह बकाया वास्तविक होता है, जबकि कुछ मामलों में टैक्स क्रेडिट, चालान अपडेट या रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियों के कारण भी ऐसी स्थिति बन जाती है. इसलिए नोटिस मिलने पर पहले उसकी पूरी जानकारी जांचना जरूरी है.

नोटिस मिलने पर क्या करें?

अगर आयकर विभाग की ओर से टैक्स डिमांड का नोटिस मिलता है तो करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जवाब दे सकता है. यदि बकाया सही है तो उसका भुगतान किया जा सकता है. अगर टैक्स पहले ही जमा किया जा चुका है तो चालान नंबर, बीएसआर कोड और भुगतान का विवरण अपलोड करना होगा. वहीं, यदि डिमांड गलत लगती है तो संबंधित दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आपत्ति दर्ज की जा सकती है. जवाब जमा करने के बाद रसीद और ट्रांजैक्शन आईडी सुरक्षित रखना भी जरूरी है.


रिफंड पर कितना पड़ सकता है असर?

पुराने टैक्स बकाये का सीधा असर रिफंड की राशि पर पड़ता है. उदाहरण के तौर पर यदि किसी करदाता का 25 हजार रुपये का रिफंड बनता है और पुराने रिकॉर्ड में 10 हजार रुपये की टैक्स देनदारी है, तो विभाग पहले उस बकाये को समायोजित करेगा और शेष राशि ही खाते में भेजेगा. यदि बकाया रिफंड से अधिक है तो पूरा रिफंड भी समायोजित किया जा सकता है. इसलिए रिफंड की स्थिति नियमित रूप से जांचना और नोटिस का समय पर जवाब देना बेहद महत्वपूर्ण है.

इन तारीखों और सावधानियों का रखें ध्यान

31 जुलाई 2026 की सामान्य आईटीआर समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, जबकि बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक दाखिल किया जा सकता है. संशोधित रिटर्न 31 मार्च 2027 तक और अपडेटेड रिटर्न निर्धारित नियमों के अनुसार बाद में भी दाखिल किए जा सकते हैं. करदाताओं को केवल आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल का ही उपयोग करना चाहिए और किसी अनजान लिंक या कॉल पर अपनी बैंक जानकारी, पैन, ओटीपी या पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए. ई-प्रोसीडिंग्स और पेंडिंग एक्शन की नियमित जांच भविष्य की परेशानियों से बचा सकती है.