नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा द्विपक्षीय व्यापार समझौता हुआ है जो भारतीय निर्यातकों के लिए तरक्की के नए रास्ते खोलने वाला है. वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक इस समझौते से भारतीय व्यवसायों को बड़ा फायदा होगा और देश का एक्सपोर्ट सेक्टर काफी मजबूत होगा.
इस डील के तहत भारत को अमेरिकी बाजार के एक बहुत बड़े हिस्से तक विशेष पहुंच मिलेगी जिससे भारतीय कंपनियों के लिए 2850 लाख करोड़ से अधिक के व्यापारिक अवसर पैदा होंगे. इसकी मदद से भारतीय कंपनियां दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अपना पैर पसार सकेंगी और चीन व वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को कड़ी टक्कर दे पाएंगी. दोनों देशों ने मिलकर करीब 48 लाख करोड़ का महत्वाकांक्षी व्यापार लक्ष्य भी तय किया है. इसे पूरा करने के लिए कई तरह के उत्पादों पर टैरिफ कम करने पर सहमति बनी है जिससे बिजनेस करना काफी आसान और सस्ता हो जाएगा.
इस समझौते से भारत के कृषि क्षेत्र को सबसे बड़ी खुशखबरी मिली है. अब भारत के कई कृषि उत्पाद बिना किसी इंपोर्ट ड्यूटी के अमेरिकी बाजार में एंट्री ले सकेंगे. इससे बासमती चावल, मसाले, फल, सब्जियां और प्रोसेस्ड फूड आइटम का एक्सपोर्ट काफी बढ़ जाएगा. जब अमेरिका में ये चीजें सस्ती मिलेंगी तो वहां के उपभोक्ताओं के बीच भारतीय सामानों की मांग तेजी से बढ़ेगी. इसके साथ ही कपड़ा और चमड़ा जैसे ज्यादा मैनपावर वाले उद्योगों में उत्पादन बढ़ने से हजारों नए रोजगार पैदा होंगे.
यह डील भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी और टेक सेक्टर के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होगी. भारत के युवा प्रोफेशनल्स और स्टार्टअप्स के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी, डिजिटल सर्विसेज और इनोवेशन के क्षेत्र में नए दरवाजे खुलेंगे. अमेरिका के साथ मजबूत कारोबारी रिश्तों की वजह से देश में विदेशी निवेश भी बढ़ेगा. कुल मिलाकर, यह व्यापार समझौता भारत के आर्थिक विकास को नई रफ्तार देने और वैश्विक व्यापार में देश का दबदबा बढ़ाने में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
आंकड़ों के अनुसार साल 2014 के मुकाबले 2026 तक भारत की विदेश व्यापार नीति में एक बड़ा ढांचागत सुधार आया है. भारत पहले असंतुलन से घिरे आरसीईपी के रास्ते पर आगे बढ़ रहा था लेकिन अब रणनीति बदलते हुए देश ने 38 देशों को कवर करने वाले 9 प्रमुख मुक्त व्यापार समझौतों पर काम किया है. इनमें से 6 महत्वपूर्ण एफटीए साल 2024 से 2026 के बीच हस्ताक्षरित किए गए हैं जो भारत की मजबूत आर्थिक कूटनीति को दर्शाते हैं.
भारत और अमेरिका के बीच हुआ यह द्विपक्षीय व्यापार समझौता दोनों लोकतांत्रिक देशों के आर्थिक और निवेश संबंधों को एक नई तथा अटूट मजबूती प्रदान करेगा. कृषि उत्पादों पर शून्य शुल्क और 2850 लाख करोड़ से अधिक के बाजार तक सीधी तरजीही पहुंच मिलना यह साबित करता है कि भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया जा रहा है. यह समझौता न केवल देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाएगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत के विनिर्माण और निर्यात के सपने को हकीकत में बदलने में मील का पत्थर साबित होगा.