भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. दोनों देशों के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हो जाएगा. इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन भी लागू होगा. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार यह कदम द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देगा. केंद्र सरकार का मानना है कि इससे किसानों, युवाओं, उद्यमियों, एमएसएमई क्षेत्र और सेवा उद्योग को लंबे समय तक लाभ मिलने की संभावना है.
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को भारत के लिए परिवर्तनकारी बताया है. उनके अनुसार समझौते के लागू होने के बाद भारत अपने 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन में शुल्क मुक्त भेज सकेगा. इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और निर्यातकों को नए बाजार मिलेंगे. सरकार का कहना है कि समझौते के दौरान कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों का विशेष ध्यान रखा गया है. चावल, चीनी, डेयरी और एथेनॉल जैसे उत्पादों पर किसी प्रकार की रियायत नहीं दी गई है, जिससे घरेलू हित सुरक्षित रहेंगे.
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— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) June 17, 2026
India-UK Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) will come into force on July 15, 2026. pic.twitter.com/Hv37sURfLU
सरकार का मानना है कि इस समझौते का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के साथ-साथ किसानों, मछुआरों और युवा उद्यमियों को भी इसका सीधा फायदा मिल सकता है. ब्रिटेन के बाजार में भारतीय वस्तुओं की पहुंच आसान होने से नए ऑर्डर और निवेश के अवसर पैदा होंगे. इससे उत्पादन बढ़ने और रोजगार सृजन को भी बल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय कारोबार को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा.
पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता भारत के भौगोलिक संकेतक यानी जीआई उत्पादों को भी मजबूत पहचान दिलाने में सहायक होगा. उन्होंने कोल्हापुरी चप्पल का उदाहरण देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसे उत्पाद जब ब्रिटेन में निर्यात होंगे तो उन्हें भारतीय पहचान के साथ अधिक मान्यता मिलेगी. इससे स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों को भी लाभ पहुंच सकता है. सरकार का मानना है कि भारतीय विशिष्ट उत्पादों की वैश्विक पहचान मजबूत होने से निर्यात को नई दिशा मिलेगी.
व्यापार समझौते के साथ लागू होने वाला डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन भारतीय पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके तहत अल्पकालिक अवधि के लिए ब्रिटेन जाने वाले भारतीय कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा अंशदान से जुड़ी सुविधाओं का लाभ मिलेगा. सॉफ्टवेयर, होटल, योग प्रशिक्षण और अन्य सेवा क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीयों को इससे विशेष फायदा होने की उम्मीद है. सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था भारतीय सेवा क्षेत्र की वैश्विक भागीदारी को और मजबूत करेगी तथा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई प्रदान करेगी.