नई दिल्ली: भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 2026 में मध्यम से मजबूत एल नीनो की संभावना जताई है. विभाग का अनुमान है कि देश में बारिश दीर्घकालिक औसत का लगभग 90 प्रतिशत रह सकती है. ऐसे में शेयर बाजार और विभिन्न उद्योगों पर इसके असर को लेकर निवेशकों और कंपनियों की नजरें मौसम के रुख पर टिकी हैं.
पिछले एल नीनो वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि कमजोर मानसून का असर हमेशा शेयर बाजार पर नकारात्मक नहीं रहा. 2023, 2018, 2015, 2009 और 2006 जैसे वर्षों में निफ्टी और बैंक निफ्टी ने अलग-अलग प्रदर्शन किया. कुछ वर्षों में बाजार ने शानदार बढ़त दर्ज की, जबकि कुछ में गिरावट भी देखने को मिली. इससे साफ है कि एल नीनो का असर हर बार समान नहीं होता और निवेशकों की धारणा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
कम बारिश का सबसे बड़ा असर कृषि और ग्रामीण आय पर पड़ सकता है. इसका प्रभाव ट्रैक्टर, दोपहिया वाहन, चीनी, उर्वरक और एग्रोकेमिकल कंपनियों पर दिखाई दे सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण मांग कमजोर पड़ने से इन क्षेत्रों की बिक्री और उत्पादन पर दबाव बन सकता है. माइक्रोफाइनेंस और ग्रामीण आवास से जुड़ी गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं.
दूसरी ओर तापमान बढ़ने और बारिश कम रहने की स्थिति कुछ उद्योगों के लिए अवसर भी ला सकती है. एयर कंडीशनर, कूलिंग उपकरण और बिजली क्षेत्र की कंपनियों की मांग बढ़ सकती है. गर्मी के कारण बिजली की खपत बढ़ने से उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण से जुड़ी कंपनियों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है. इसलिए निवेशकों की नजर अब मौसम और उससे जुड़े सेक्टरों पर बनी हुई है.