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India Daily

एक साथ कई झटके! बॉन्ड यील्ड, FPI बिकवाली और ईरान तनाव से बाजार बेहाल; शेयर बाजार में मचा हाहाकार

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को एक बार फिर भारी गिरावट देखने को मिली. सेंसेक्स इंट्रा-डे हाई से 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी में 300 अंक से ज्यादा की गिरावट आई.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
एक साथ कई झटके! बॉन्ड यील्ड, FPI बिकवाली और ईरान तनाव से बाजार बेहाल; शेयर बाजार में मचा हाहाकार
Courtesy: Pinterest

शुक्रवार की रिकवरी के बाद भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को एक बार फिर भारी बिकवाली देखने को मिली. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स अपने इंट्रा-डे हाई से 1000 अंक से ज्यादा नीचे आ गया. दोपहर 1 बजे के बाद सेंसेक्स 71,850 अंक के नीचे कारोबार करता नजर आया. वहीं निफ्टी में भी 300 अंक से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. बाजार में इस कमजोरी के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं.

शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव सरकारी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड से बना हुआ है. अमेरिका और भारत दोनों में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी है. अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.3 फीसदी के पार पहुंचने की खबरों के बाद सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर निवेशकों का रुझान बढ़ा है.

सरकारी बॉन्ड पर क्या पड़ा असर?

भारत में भी 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.37 फीसदी तक पहुंच गई. यह करीब तीन साल का उच्च स्तर बताया जा रहा है. बॉन्ड यील्ड में यह तेजी RBI की ओर से बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी कम करने के उपायों की घोषणा के बाद देखने को मिली है.

CRR को लेकर RBI का बड़ा फैसला

RBI ने बैंकों के कैश रिजर्व रेशियो यानी CRR को लेकर भी नियमों में बदलाव किया है. 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े से बैंकों को अपनी CRR जरूरत का कम से कम 99 फीसदी डेली बैलेंस बनाए रखना होगा. अभी यह सीमा 90 फीसदी है. बाजार में इस बदलाव को बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी पर असर डालने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है.

FPI की लगातार बिकवाली से बढ़ी चिंता

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी दबाव बढ़ा रही है. अक्टूबर में अब तक सिर्फ छह कारोबारी सत्रों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब 45,125 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं. यह आंकड़ा सितंबर में हुई करीब 45,536 करोड़ रुपये की कुल बिकवाली के लगभग बराबर है.

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, अक्टूबर में FII की बिकवाली तेज होने के कारण 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की भारतीय इक्विटी में कुल बिकवाली करीब 3,60,952 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.

ईरान-हूथी तनाव ने भी बढ़ाई चिंता

बाजार की चिंता सिर्फ घरेलू आर्थिक संकेतकों तक सीमित नहीं है. ईरान ने युद्ध खत्म करने के अमेरिकी प्रस्ताव पर मिले हालिया जवाब को नाकाफी बताते हुए खारिज कर दिया है. ईरान की ओर से क्षेत्रीय डेटा सेंटरों और केबलों पर हमले की चेतावनी ने भी वैश्विक तनाव बढ़ाया है.

वहीं यमन के हूथी विद्रोहियों ने रियाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली है. इस हमले में 13 लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई. सऊदी अधिकारियों ने रविवार को एयरपोर्ट पर एक और हमले में लोगों के घायल होने की जानकारी दी.

पिछली तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग भी वजह

बाजार में सोमवार की गिरावट की एक वजह प्रॉफिट बुकिंग भी मानी जा रही है. सेंसेक्स और निफ्टी पिछले सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुए थे और लगातार आठ सप्ताह की गिरावट का सिलसिला भी टूटा था. ऐसे में कुछ निवेशकों ने हाल की तेजी के बाद मुनाफा वसूलना शुरू किया.

कुल मिलाकर बढ़ती बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, RBI के लिक्विडिटी से जुड़े कदम, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और प्रॉफिट बुकिंग ने सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर दबाव बढ़ा दिया. आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर विदेशी फंडों के रुख, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक घटनाक्रम पर रहेगी.