भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) एशियाई व्यापार परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला सकता है. यह समझौता 15 जुलाई से प्रभावी होने की उम्मीद है, जिसके बाद भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में विशेष शुल्क लाभ मिलेगा. व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय निर्यातकों की स्थिति और मजबूत होगी. वहीं, ऐसे देश जो पहले से ब्रिटेन को समान श्रेणी के उत्पाद भेजते हैं, उन्हें नई प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है. खासतौर पर बांग्लादेश और पाकिस्तान के लिए यह समझौता नई चुनौतियां लेकर आता दिख रहा है.
व्यापार आंकड़ों के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि बांग्लादेश उन देशों में शामिल है, जिन पर इस समझौते का सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है. ब्रिटेन को भेजे जाने वाले उसके निर्यात का एक हिस्सा ऐसे उत्पादों में है, जहां भारत पहले से मजबूत उपस्थिति रखता है. शुल्क लाभ मिलने के बाद भारतीय वस्तुएं अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं, जिससे बांग्लादेशी उत्पादों की मांग प्रभावित होने की आशंका है. अनुमान है कि ब्रिटेन को होने वाले उसके निर्यात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दबाव में आ सकता है. यही कारण है कि इस समझौते को दक्षिण एशियाई व्यापार संतुलन में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
कपड़ा उद्योग उन प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है जहां प्रतिस्पर्धा सबसे अधिक बढ़ सकती है. बांग्लादेश लंबे समय से ब्रिटेन के बाजार में परिधान और वस्त्र उत्पादों का बड़ा निर्यातक रहा है. दूसरी ओर भारत भी इस क्षेत्र में अपनी क्षमता लगातार बढ़ा रहा है. इसके अलावा चावल का व्यापार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. भारत पहले से ही ब्रिटेन को बड़ी मात्रा में चावल निर्यात करता है. शुल्क लाभ मिलने के बाद भारतीय चावल की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत हो सकती है, जिससे पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए बाजार हिस्सेदारी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोसेस्ड फूड और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में भारत को बड़ा लाभ मिल सकता है. भारतीय कंपनियां पहले से ही ब्रिटेन में मजबूत उपस्थिति रखती हैं और शुल्क बाधाएं कम होने से उनके लिए नए अवसर खुल सकते हैं. खासकर दवा उद्योग में भारत का निर्यात कई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में काफी अधिक है. ऐसे में यह समझौता भारतीय निर्माताओं को अपने कारोबार का विस्तार करने और ब्रिटेन के बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर प्रदान कर सकता है. खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में भी भारतीय कंपनियों के लिए संभावनाएं बढ़ती दिखाई दे रही हैं.
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता केवल दो देशों के बीच व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है. इसका असर पूरे एशियाई क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है. रसायन, पेट्रोलियम उत्पाद, प्लास्टिक और औद्योगिक सामान जैसे क्षेत्रों में भी भारत की स्थिति मजबूत होने की संभावना है. इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोप के बड़े उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी. वहीं, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों को अपनी निर्यात रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है. आने वाले महीनों में यह समझौता क्षेत्रीय व्यापार की दिशा और प्रतिस्पर्धा दोनों को प्रभावित करता नजर आ सकता है.