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सरकार के पास भारतीयों के 1.1 लाख करोड़ रुपए पड़े हुए हैं लावारिस, नहीं मिल रहे दावेदार

बाजार के जानकारों का कहना है कि यह समस्या मुख्य रूप से पुराने खातों से संबंधित है जहां केवाईसी डिजिटल के बजाय मैन्युअल रूप में की जाती थी.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
सरकार के पास भारतीयों के 1.1 लाख करोड़ रुपए पड़े हुए हैं लावारिस, नहीं मिल रहे दावेदार
Courtesy: pinterest

सरकार द्वारा लोकसभा को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, भारतीयों की कुल लावारिस वित्तीय संपत्ति वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 1.1 लाख करोड़ रुपए हो गई है. इसमें से 83,000 करोड़ रुपए से अधिक लावारिस रुपए बैंक में जमा हैं जबकि 10,000 करोड़ रुपए की लावारिस संपत्ति शेयरों के रूप में और  14,000 करोड़ रुपए बीमा पॉलिसियों के रूप में जमा हैं.

चूंकि इस संपत्तियों पर अभी तक किसी ने दावा नहीं किया है इसलिये वर्तमान में ये संपत्तियां विभिन्न नियामकों के नियंत्रण में हैं. आरबीआई इस धन को जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष में रखता है  जबकि बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) इसे निवेशक संरक्षण एवं शिक्षा कोष (IPEF) में रखता है.

बाजार के जानकारों का कहना है कि यह समस्या मुख्य रूप से पुराने खातों से संबंधित है जहां केवाईसी डिजिटल के बजाय मैन्युअल रूप में की जाती थी.

आधा-पैन लिंक होने से पहले खाते हस्तलिखित नामों, स्पेलिंग में मामूली गलतियों और अस्थायी पते  से रजिस्टर्ड होते थे, ऐसे में जब लाभार्थी धनराशि निकालने के लिए डिजिट केवाईसी कराना चाहता है तो ये विसंगतियां एक चुनौती बन जाती हैं.

इसके अलावा, पहले के कई मामलों में नामांकित व्यक्ति का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया था. इसलिए, मृतक व्यक्ति के नामांकित व्यक्ति के डिटेल को अपडेट करने और कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा इन संपत्तियों पर दावा करने के लिए परिवार के सभी सदस्यों से उत्तरादायित्व प्रमाण पत्र (NOC) की आवश्यकता होती है.

क्यूएल पार्टनर्स के संस्थापक और प्रबंध भागीदार एस.ए. कार्तिक ने कहा, 'जनसंख्या में धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से बढ़ती उम्र के साथ, लावारिस संपत्तियों की समस्या निकट भविष्य में और भी गंभीर हो जाएगी. समय के साथ, लिखावट और इसलिए हस्ताक्षर बदल जाते हैं. वरिष्ठ नागरिकों के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट प्राप्त करना मुश्किल है क्योंकि उम्र के साथ उंगलियां स्पष्ट छाप छोड़ने में असमर्थ हो जाती हैं. सरकार, आरबीआई, एसबीआई और अन्य हितधारकों को इस समस्या के समाधान के लिए एक नीति बनाने के लिए एक साथ आना चाहिए.'

लावारिस संपत्तियों पर दावा नहीं कर रहे लोग

सरकार ने लाभार्थियों के लिए ऐसी संपत्तियों को वापस पाने की प्रक्रिया में ढील दी है. सभी नियामक निकायों ने ऐसी निकासी को सुविधानजनक बनाने के लिए विशेष प्लेटफॉर्म बनाकर प्रक्रियाओं को डिजिटल कर दिया है. दरअसल आरबीआई ने हाल ही में एक योजना शुरू की थी जिसके तहत अपने खातों पर सफलतापूर्वक दावा करने वाले लोगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है. हालांकि इसके बावजूद प्राप्त दावों की कुल संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है.

पिछले साल आरबीआई, सेबी और आईआरडीएआई ने मिलकर, 'आपका पैसा, आपका अधिकार' नाम से एक जागरूकता अभियान शुरू किया था  जिसने देशभर के 748 जिलों को कवर किया था. सरकार ने  लोकसभा में बताया था कि इस योजना के माध्यम से 5,777 करोड़ रुपए की लावारिस संपत्ति लोगों को वापस प्राप्त हुई है.