ईरान जंग के बीच अचानक सोने-चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट, जानें कितना हुआ सस्ता
ईरान संघर्ष के बीच एमसीएक्स पर सोना और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है. चांदी 15000 रुपये और सोना 8000 रुपये सस्ता हुआ.
नई दिल्ली: ईरान जंग के बीच सोना और चांदी के बाजार में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है. एमसीएक्स पर दोनों कीमती धातुओं के दामों में एक ही दिन में बड़ा झटका देखने को मिला.
ताजा आंकड़ों के अनुसार चांदी की कीमत में करीब 15000 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है. सोमवार को 5 मई एक्सपायरी वाली चांदी का भाव गिरकर 2,11,729 रुपये प्रति किलो पर आ गया. यह कीमत पिछले शुक्रवार के बंद 2,26,772 रुपये के मुकाबले 15,043 रुपये कम है.
कितना था पुराना रिकॉर्ड?
अगर चांदी के पुराने रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें, तो 29 जनवरी को इसका हाई 4,20,048 रुपये प्रति किलो था. इस हिसाब से अब तक चांदी की कीमत में 2 लाख रुपये से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है. यह गिरावट बाजार में अस्थिरता और निवेशकों की बदलती रणनीति को दर्शाती है.
कितना है सोने की कीमत?
वहीं सोने की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोने का वायदा भाव सोमवार को खुलते ही 8000 रुपये से ज्यादा गिर गया. 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना 1,44,492 रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर 1,36,403 रुपये पर आ गया.
अगर सोने के हाई लेवल से तुलना करें, तो 29 जनवरी को यह 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था. इस स्तर से अब तक सोने की कीमत करीब 56,693 रुपये तक गिर चुकी है. वहीं 27 फरवरी के स्तर से भी सोना 25,000 रुपये से ज्यादा सस्ता हो चुका है.
वैश्विक तनाव का क्या पड़ा असर?
आमतौर पर वैश्विक तनाव और युद्ध के समय सोना-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है. मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के बावजूद कीमतों में गिरावट जारी है.
क्या हो सकता है इसके पीछे का कारण?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने सोना-चांदी पर दबाव बढ़ाया है. महंगे क्रूड ऑयल से महंगाई का खतरा बढ़ा है, जबकि मजबूत डॉलर के कारण निवेशक इन धातुओं से दूरी बना रहे हैं.
इसके अलावा उच्च ब्याज दरें भी सोना-चांदी की कीमतों को नीचे धकेल रही हैं. हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इन धातुओं में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है.