नई दिल्ली: 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया जाएगा. इस बजट से आम लोगों को कई तरह की राहत की उम्मीद है. खासतौर पर सोना और चांदी खरीदने वालों की नजर सरकार के फैसलों पर टिकी है. फिलहाल, सोना-चांदी की कीमतें अपने ऑल टाइम हाई रिकॉर्ड के आसपास बनी हुई हैं.
बीते शुक्रवार को एमसीएक्स पर सोना 1,55,963 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3,34,600 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी. ये दोनों कीमती धातुएं अपने रिकॉर्ड स्तर के बेहद पास हैं. बजट से पहले इतनी ऊंची कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बजट में सही कदम उठाए गए तो कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है.
सोना-चांदी में तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण हैं. ग्रीनलैंड से जुड़ा तनाव, डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी फेड रिजर्व पर बढ़ता दबाव बाजार में अनिश्चितता पैदा कर रहा है. ऐसी स्थिति में निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और चांदी खरीदते हैं. इसी वजह से इनकी मांग बढ़ रही है और दाम ऊपर बने हुए हैं.
कमोडिटी बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि सरकार को बजट में टैक्स नियमों में कुछ राहत देनी चाहिए. खासकर डिजिटल गोल्ड को बढ़ावा देने के लिए आसान नियम और कम टैक्स की मांग की जा रही है. इससे निवेशकों का ध्यान फिजिकल गोल्ड के साथ-साथ डिजिटल गोल्ड की ओर भी बढ़ सकता है.
फिलहाल, देश में सोने-चांदी की ज्वेलरी पर 3 प्रतिशत जीएसटी लगता है. लगातार बढ़ती कीमतों के बीच इस जीएसटी को कम करने की मांग तेज हो गई है. अगर जीएसटी दर घटाई जाती है, तो गहनों की कीमत सीधे तौर पर कम हो सकती है. इससे आम ग्राहकों को राहत मिलेगी.
भारत में सोना-चांदी सिर्फ निवेश नहीं बल्कि परंपरा से जुड़ा है. शादी-ब्याह और त्योहारों में गहनों की खरीद आम बात है. शादी का सीजन नजदीक है और ऐसे में ऊंची कीमतें लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं. अगर बजट में गहनों पर टैक्स में राहत मिलती है तो यह आम जनता के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है.