नई दिल्ली: रेलवे बजट 2026 को लेकर उम्मीदें विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जुड़ गई हैं. परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. भारतीय रेलवे देश के दूरदराज इलाकों को जोड़ने के साथ सस्ता और टिकाऊ परिवहन उपलब्ध कराता है. वर्तमान में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क और दूसरा सबसे बड़ा मालवाहक है.
पिछले दो से तीन वर्षों में रेलवे को 2 से 2.5 लाख करोड़ रुपये तक का बजटीय आवंटन मिला है. इस निवेश से ट्रैक और रोलिंग स्टॉक का विस्तार हुआ है. इसके बावजूद मालगाड़ियों की औसत रफ्तार 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा और पैसेंजर ट्रेनों की 50 से 52 किलोमीटर प्रति घंटा बनी हुई है.
बड़े सरकारी निवेश के बावजूद ट्रैक, रेलवे स्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स जैसे पहलुओं में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी अभी तक खास नहीं बढ़ी है. दूसरे तरीकों, खासकर एक्सप्रेसवे के साथ मुकाबले के लिए, 2030 तक माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी को 30 प्रतिशत से कम से बढ़ाकर 45 प्रतिशत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए एक स्पष्ट वैल्यू प्रपोजिशन की जरूरत है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अब इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को संरचनात्मक सुधारों से जोड़ना जरूरी है. रेलवे बजट 2026 में निजी निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस की जरूरत बताई जा रही है. सरकारी निवेश लंबे समय तक पर्याप्त नहीं माना जा रहा है.
पीपीपी मॉडल के जरिए निजी पूंजी और नई तकनीक को रेलवे से जोड़ने की मांग की जा रही है. जोखिम के स्पष्ट बंटवारे और निवेशक अनुकूल ढांचे से निजी भागीदारी बढ़ सकती है. निर्माण क्षेत्र में वंदे भारत ट्रेनों और कवच जैसी तकनीकों की सफलता को आगे बढ़ाने पर जोर है.
रेलवे कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में भारत को वैश्विक हब बनाने की संभावना जताई जा रही है. इसके लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव जैसे प्रावधान लाए जा सकते हैं. मालगाड़ी सेक्टर के लिए टैरिफ स्ट्रक्चर को उद्योग के अनुरूप बनाने की जरूरत बताई गई है.
डायनामिक प्राइसिंग और मल्टी ऑपरेटर मॉडल से रेल मालगाड़ियों प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने तेज और भरोसेमंद माल परिवहन की क्षमता दिखाई है. आने वाले समय में नए मालगाड़ी कॉरिडोर विकसित करने की सिफारिश की जा रही है. साथ ही इंटरमोडल मालगाड़ी टर्मिनल और हाई स्पीड वैगन पर निवेश की जरूरत बताई गई है.
संस्थागत ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है. अभी रोलिंग स्टॉक और ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच तालमेल की कमी देखी जा रही है. सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं जैसे कवच 4.0 और एडवांस सिग्नलिंग सिस्टम की रफ्तार धीमी है. बजट से उम्मीद है कि यह पूंजी पुनर्चक्रण और निजी भागीदारी को नई दिशा देगा.