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नौकरी नहीं फिर भी मिलेगा PF? दुकानदारों से लेकर गिग वर्कर्स तक की अकाउंट खोलने की हो रही तैयारी; जानें इसके फायदे और नुकसान

EPFO असंगठित क्षेत्र, गिग वर्कर्स, फ्रीलांसरों और स्वरोजगार करने वालों के लिए यूनिवर्सल पीएफ स्कीम लाने की तैयारी कर रहा है. इससे करोड़ों लोगों को रिटायरमेंट बचत की सुविधा मिल सकती है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
नौकरी नहीं फिर भी मिलेगा PF? दुकानदारों से लेकर गिग वर्कर्स तक की अकाउंट खोलने की हो रही तैयारी; जानें इसके फायदे और नुकसान
Courtesy: Pinterest (Representative image)

नई दिल्ली: एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन यानी EPFO देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों, गिग वर्कर्स, फ्रीलांसरों और स्वरोजगार करने वाले लोगों के लिए एक नई यूनिवर्सल पीएफ स्कीम लाने की तैयारी कर रहा है. इस प्रस्ताव का उद्देश्य उन लाखों लोगों को रिटायरमेंट बचत की सुविधा देना है जो अब तक EPF के दायरे से बाहर रहे हैं. 

फिलहाल यह योजना शुरुआती चरण में है और इस पर विचार किया जा रहा है. यदि इसे मंजूरी मिलती है तो देश के करोड़ों लोगों के लिए सुरक्षित भविष्य की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है.

वर्तमान में किन लोगों मिल रहा इसका लाभ?

वर्तमान में EPF का लाभ मुख्य रूप से उन कर्मचारियों को मिलता है जो 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में नौकरी करते हैं. नई योजना के तहत फ्रीलांसर, दुकानदार, कंसलटेंट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग वर्कर्स, ओला उबर ड्राइवर, जोमैटो और स्विगी डिलीवरी पार्टनर तथा स्वरोजगार करने वाले लोग भी अपनी इच्छा से EPFO में पीएफ खाता खोलकर नियमित बचत कर सकेंगे. इससे असंगठित क्षेत्र के लोगों को भी संगठित बचत का अवसर मिलेगा.

क्या है इस स्कीम का सबसे बड़ा फायदा?

यूनिवर्सल पीएफ स्कीम का सबसे बड़ा फायदा सुरक्षित रिटायरमेंट फंड तैयार करना होगा. भारत की बड़ी आबादी असंगठित क्षेत्र में काम करती है और उनके पास बुढ़ापे के लिए कोई निश्चित सामाजिक सुरक्षा नहीं होती. ऐसे में यह योजना भविष्य के लिए मजबूत आर्थिक सहारा बन सकती है. EPFO में जमा राशि पर सरकार की व्यवस्था के तहत ब्याज मिलता है. 

वर्तमान में कितना मिल रहा ब्याज?

वर्तमान में पीएफ पर 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जा रहा है, जो कई पारंपरिक बैंक जमा योजनाओं से अधिक है. इसके अलावा सालाना 2.5 लाख रुपये तक के कर्मचारी योगदान पर मिलने वाला ब्याज टैक्स मुक्त रहने का लाभ भी मिल सकता है.

इस प्रस्ताव की एक खास बात यह भी हो सकती है कि इसमें जमा राशि को लेकर अधिक लचीलापन दिया जाए. नौकरीपेशा कर्मचारियों की तरह हर महीने निश्चित राशि जमा करना जरूरी नहीं होगा. संभावना है कि लोग अपनी आय के अनुसार रोजाना, मासिक या सालाना आधार पर भी पैसा जमा कर सकेंगे. इससे अनियमित आय वाले लोगों को काफी सुविधा मिलेगी.

क्या है इसका नुकसान?

हालांकि इस योजना की कुछ चुनौतियां भी हैं. नौकरीपेशा कर्मचारियों के EPF खाते में कर्मचारी के योगदान के बराबर कंपनी भी योगदान देती है, लेकिन यूनिवर्सल पीएफ स्कीम में पूरा पैसा स्वयं व्यक्ति को ही जमा करना होगा. इसमें नियोक्ता या सरकार की ओर से योगदान मिलने की संभावना फिलहाल नहीं है. 

इसके अलावा पीएफ खाते से जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा निकालना आसान नहीं होता. समय से पहले निकासी पर नियम लागू होंगे और पांच साल से पहले निकासी करने पर टैक्स का असर भी पड़ सकता है. इसलिए यह योजना मुख्य रूप से लंबी अवधि की बचत के लिए उपयुक्त मानी जाएगी.