नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर 2025 से शुरू होने वाला है और इससे पहले ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है. केंद्र सरकार द्वारा नवंबर की शुरुआत में आयोग की रूपरेखा (Terms of Reference) संबंधी अधिसूचना तो जारी कर दी गई, लेकिन कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अब भी स्पष्टता नहीं है. इसी कारण कर्मचारी वर्ग उम्मीद कर रहा है कि सत्र के दौरान सरकार 8वें वेतन आयोग के क्रियान्वयन और दिशा-निर्देशों पर कोई ठोस घोषणा करे.
केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से 8वें वेतन आयोग को कार्य प्रारंभ करने की अनुमति दे दी है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग को अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने में 12 से 18 महीने का समय लग सकता है. कर्मचारियों और पेंशनर्स की इच्छा है कि वेतन संशोधन जल्द लागू हो, लेकिन ऐतिहासिक अनुभव इसके विपरीत संकेत देता है.
7वें वेतन आयोग का गठन 2014 में हुआ था और उसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू की गईं. आमतौर पर केंद्र सरकार लगभग हर 10 साल में वेतन आयोग का गठन करती है, जिसके आधार पर अधिकांश राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों की सैलरी में संशोधन करती हैं.
पिछले वेतन आयोग के समय जेसीएम-स्टाफ साइड संगठनों और पेंशनर्स एसोसिएशंस ने मांग की थी कि 7वीं सीपीसी की सिफारिशें 1 जनवरी 2014 से प्रभावी की जाएं. उनका तर्क था कि महंगाई भत्ता (DA) को बेसिक पे में शामिल न करने से वेतन का वास्तविक मूल्य घट रहा है. इसके साथ ही सैलरी रिवीजन चक्र को 5 साल करने की भी मांग उठी थी.
हालांकि 7वें वेतन आयोग ने इन सभी मांगों को खारिज कर दिया. आयोग का कहना था कि वह 2014 में गठित हुआ है और 6वें वेतन आयोग द्वारा निर्धारित 10 साल की अवधि पूरी होने से पहले सिफारिशें नहीं लागू की जा सकतीं. आयोग ने स्पष्ट किया कि 7वीं सीपीसी के लाभ 1 जनवरी 2016 से ही लागू होंगे और उससे पहले तारीख तय करना संभव नहीं है.
इस बार भी अनुमान यही है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें तय समयसीमा के अनुसार ही लागू होंगी. हालांकि कर्मचारियों और पेंशनर्स को उम्मीद है कि सरकार कुछ राहतदेय घोषणाएँ कर सकती है.
शीतकालीन सत्र में विपक्ष और कर्मचारी हित से जुड़े सांसद इस विषय पर सवाल उठाने की तैयारी में हैं. अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि सरकार क्या कर्मचारियों और पेंशनर्स की अपेक्षाओं के अनुरूप कोई बड़ा निर्णय लेती है या फिर 8वें वेतन आयोग का क्रियान्वयन तय प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ाया जाएगा.