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India Daily

DA-DR मर्जर पर फिर संकट, कर्मचारियों को लग सकता है बड़ा झटका! 7वें वेतन आयोग में भी ठुकराई गई थी मांग

केंद्रीय कर्मचारियों की DA-DR मर्जर की उम्मीदों को फिर झटका लग सकता है. 7वें वेतन आयोग में भी यह मांग अस्वीकार की गई थी. 8वें वेतन आयोग के शुरू होने के बावजूद सरकार का रुख अब तक स्पष्ट नहीं है, जिससे कर्मचारियों में चिंता बढ़ी है.

Kanhaiya Kumar Jha
DA-DR मर्जर पर फिर संकट, कर्मचारियों को लग सकता है बड़ा झटका! 7वें वेतन आयोग में भी ठुकराई गई थी मांग
Courtesy: Gemini AI

नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर 2025 से शुरू होने वाला है और इससे पहले ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है. केंद्र सरकार द्वारा नवंबर की शुरुआत में आयोग की रूपरेखा (Terms of Reference) संबंधी अधिसूचना तो जारी कर दी गई, लेकिन कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अब भी स्पष्टता नहीं है. इसी कारण कर्मचारी वर्ग उम्मीद कर रहा है कि सत्र के दौरान सरकार 8वें वेतन आयोग के क्रियान्वयन और दिशा-निर्देशों पर कोई ठोस घोषणा करे.

8वें वेतन आयोग ने शुरू किया काम, सिफारिशें आने में लगेगा समय

केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से 8वें वेतन आयोग को कार्य प्रारंभ करने की अनुमति दे दी है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग को अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने में 12 से 18 महीने का समय लग सकता है. कर्मचारियों और पेंशनर्स की इच्छा है कि वेतन संशोधन जल्द लागू हो, लेकिन ऐतिहासिक अनुभव इसके विपरीत संकेत देता है.

7वें वेतन आयोग का गठन 2014 में हुआ था और उसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू की गईं. आमतौर पर केंद्र सरकार लगभग हर 10 साल में वेतन आयोग का गठन करती है, जिसके आधार पर अधिकांश राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों की सैलरी में संशोधन करती हैं.

7वें वेतन आयोग की पहले लागू करने की मांग ठुकराई गई थी

पिछले वेतन आयोग के समय जेसीएम-स्टाफ साइड संगठनों और पेंशनर्स एसोसिएशंस ने मांग की थी कि 7वीं सीपीसी की सिफारिशें 1 जनवरी 2014 से प्रभावी की जाएं. उनका तर्क था कि महंगाई भत्ता (DA) को बेसिक पे में शामिल न करने से वेतन का वास्तविक मूल्य घट रहा है. इसके साथ ही सैलरी रिवीजन चक्र को 5 साल करने की भी मांग उठी थी.

हालांकि 7वें वेतन आयोग ने इन सभी मांगों को खारिज कर दिया. आयोग का कहना था कि वह 2014 में गठित हुआ है और 6वें वेतन आयोग द्वारा निर्धारित 10 साल की अवधि पूरी होने से पहले सिफारिशें नहीं लागू की जा सकतीं. आयोग ने स्पष्ट किया कि 7वीं सीपीसी के लाभ 1 जनवरी 2016 से ही लागू होंगे और उससे पहले तारीख तय करना संभव नहीं है.

8वें वेतन आयोग को लेकर नई मांगें, DA-DR मर्जर की जोरदार अपील

इस बार भी अनुमान यही है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें तय समयसीमा के अनुसार ही लागू होंगी. हालांकि कर्मचारियों और पेंशनर्स को उम्मीद है कि सरकार कुछ राहतदेय घोषणाएँ कर सकती है.

यूनियनों की प्रमुख मांगें क्या है?

  • महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) को बेसिक पे में शामिल किया जाए.
  • मौजूदा DA वास्तविक महंगाई को कवर करने में सक्षम नहीं है, इसलिए इसे वेतन संरचना में समायोजित किया जाए.
  • पेंशन सुधारों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं 
  • सिफारिशें कब लागू होंगी, इस पर भी सरकार सत्र में स्पष्टता दे.

संसद सत्र में उठ सकता है मुद्दा

शीतकालीन सत्र में विपक्ष और कर्मचारी हित से जुड़े सांसद इस विषय पर सवाल उठाने की तैयारी में हैं. अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि सरकार क्या कर्मचारियों और पेंशनर्स की अपेक्षाओं के अनुरूप कोई बड़ा निर्णय लेती है या फिर 8वें वेतन आयोग का क्रियान्वयन तय प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ाया जाएगा.