वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया. इसमें ग्रामीण रोजगार के लिए बड़ा बदलाव आया है. नई योजना 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी वीबी-जी राम जी को 95,692 करोड़ रुपये का बजट मिला है. यह योजना पुरानी मनरेगा की जगह ले रही है. पिछले साल मनरेगा के लिए 86,000 करोड़ रुपये का प्रावधान था. इस बार केंद्र का हिस्सा ही 11 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है.
मनरेगा को 30,000 करोड़ रुपये मिले हैं, क्योंकि नई योजना पूरी तरह लागू होने तक पुरानी योजना जारी रहेगी. दोनों योजनाओं को मिलाकर कुल 1.25 लाख करोड़ से ज्यादा का बजट है, जो पिछले साल के मुकाबले 43 प्रतिशत ज्यादा है. ग्रामीण विकास मंत्रालय का कुल बजट भी 21 प्रतिशत बढ़ा है.
सरकार मनरेगा में काम की मांग कम होने के कारण नई योजना लाई है. आर्थिक समीक्षा 2025-26 में कहा गया है कि महामारी के समय 2021 में व्यक्ति-दिवस 389 करोड़ के करीब पहुंच गए थे. लेकिन अब 2025-26 में (31 दिसंबर तक) ये घटकर 184 करोड़ के आसपास रह गए हैं. यानी 53 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है. ग्रामीण इलाकों में अब नॉन-फार्म काम बढ़ रहे हैं और बेरोजगारी कम हुई है.
वीबी-जी राम जी योजना में रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है. योजना के तहत श्रमिकों को शारीरिक काम करना होगा, बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य है और 370 रुपये की मजदूरी सीधे बैंक खाते में आएगी. योजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और बुनियादी ढांचे पर फोकस किया गया है. सरकार का कहना है कि यह योजना मनरेगा की कमियों को दूर करेगी और विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ेगी.
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह बजट ऐतिहासिक है. राज्यों के हिस्से को मिलाकर वीबी-जी राम जी के लिए 1.51 लाख करोड़ से ज्यादा का प्रावधान है. इससे गांवों में आत्मनिर्भरता और रोजगार बढ़ेगा. हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि 125 दिन की गारंटी पूरी करने के लिए और ज्यादा बजट की जरूरत है. फिलहाल यह ट्रांजिशन पीरियड है. मनरेगा के पुराने काम पूरे होने तक दोनों योजनाएं चलेंगी. बजट से ग्रामीण इलाकों में आय और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने की उम्मीद है.