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India Daily

BRICS में अमेरिका की टैरिफ नीति पर बड़ा वार, ट्रंप का नाम लिए बिना देशों ने दे दिया साफ संदेश

BRICS देशों ने एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई है. समूह के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने कहा कि ऊंचे टैरिफ और गैर टैरिफ बाधाएं वैश्विक व्यापार के लिए परेशानी बढ़ा रही हैं.

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Edited By: Reepu Kumari
BRICS में अमेरिका की टैरिफ नीति पर बड़ा वार, ट्रंप का नाम लिए बिना देशों ने दे दिया साफ संदेश
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में हो रहे BRICS Summit 2026 से पहले व्यापार को लेकर सदस्य देशों ने अपना रुख साफ कर दिया है. BRICS के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों ने एकतरफा तरीके से लगाए जाने वाले ऊंचे टैरिफ और दूसरे व्यापारिक प्रतिबंधों पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि ऐसे फैसलों से वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है और पहले से दबाव झेल रही दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए नए जोखिम खड़े हो सकते हैं.

दिलचस्प बात यह है कि संयुक्त बयान में अमेरिका या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सीधे नहीं लिया गया. इसके बावजूद बयान में एकतरफा व्यापारिक कदमों, ऊंचे टैरिफ और व्यापार बाधाओं का जिस तरह उल्लेख किया गया है, उसे अमेरिकी नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है. BRICS ने ऐसी व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया है, जो खुली, पारदर्शी, गैर भेदभावपूर्ण और तय नियमों पर आधारित हो.

टैरिफ के खिलाफ BRICS का साफ संदेश

BRICS के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों ने कहा कि ज्यादा टैरिफ और गैर टैरिफ बाधाएं अंतरराष्ट्रीय व्यापार में असंतुलन पैदा कर सकती हैं. समूह का मानना है कि ऐसे कदम WTO के तय नियमों के अनुरूप नहीं होने चाहिए. BRICS ने बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है, ताकि देशों के बीच कारोबार किसी एकतरफा फैसले से अचानक प्रभावित न हो और वैश्विक व्यापार में भरोसा बना रहे.

बिना नाम लिए अमेरिका की नीति पर निशाना

संयुक्त बयान में ट्रंप या अमेरिका का नाम भले नहीं है, लेकिन संकेत स्पष्ट माने जा रहे हैं. अमेरिकी व्यापार नीति में कई देशों के साथ टैरिफ को लेकर सख्त रुख देखने को मिला है. साथ ही BRICS से जुड़ने और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ की धमकियों ने भी चिंता बढ़ाई है. ऐसे में BRICS का ताजा रुख व्यापारिक दबाव के खिलाफ सामूहिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.

दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंता

BRICS देशों ने मौजूदा वैश्विक आर्थिक हालात पर भी चिंता जताई है. भू राजनीतिक तनाव, व्यापार का बंटवारा, नीतियों को लेकर अनिश्चितता, महंगाई और बढ़ता कर्ज जैसी चुनौतियां अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही हैं. समूह के अनुसार इन परिस्थितियों का दबाव खासतौर पर उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है. ऐसे समय में व्यापार को और मुश्किल बनाने वाले कदम वैश्विक आर्थिक स्थिति के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं.

WTO के नियमों वाली व्यवस्था की मांग

BRICS चाहता है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में WTO की केंद्रीय भूमिका बनी रहे. समूह की मांग है कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार के नियम सभी देशों के लिए समान और स्पष्ट हों. किसी एक देश के अचानक लिए गए फैसले से दूसरे देशों के कारोबार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर नहीं पड़ना चाहिए. BRICS का यह रुख ऐसे समय आया है, जब टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों को लेकर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव लगातार चर्चा में है.