महंगाई के कारण लद गए त्योहारों पर खरीदारी के दिन? अक्षय तृतीया पर सोने की मांग में रही सुस्ती

अक्षय तृतीया पर सोने की रिकॉर्ड कीमतों ने खरीदारी को कम कर दिया. त्योहार पर गहनों की बजाय सिक्कों और ईटीएफ में निवेश बढ़ा. ग्राहक अब कीमत गिरने का इंतजार कर रहे हैं

pinterest
Sagar Bhardwaj

भारत के सबसे शुभ त्योहारों में से एक अक्षय तृतीया पर इस बार सोने की मांग में अप्रत्याशित गिरावट देखी गई. पिछले साल के मुकाबले सोने के भाव 63 फीसदी ज्यादा होने के कारण आम ग्राहकों ने गहने खरीदने से किनारा कर लिया. वहीं, सोने के सिक्कों और गोल्ड ईटीएफ जैसे निवेश विकल्पों की तरफ रुख बढ़ा है. ज्वैलर्स के अनुसार, दक्षिण भारत को छोड़कर अधिकतर राज्यों में दुकानों पर रौनक कम रही. रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार अक्षय तृतीया पर सोने की खरीदारी में 30 फीसदी की गिरावट आई है.

त्योहार पर नहीं अब गिरावट पर खरीदारी को प्राथमिकता

इस बार अक्षय तृतीया पर सोने की मांग में कमी ने यह साफ कर दिया है कि अब खरीदार त्योहार के मुकाबले कीमतों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. भारतीय बुलियन एसोसिएशन के सुरेंद्र मेहता के अनुसार, देशभर में पैरवी कम रही. ग्राहकों ने भारी गहनों के बदले हल्के सिक्कों को प्राथमिकता दी, क्योंकि उन पर मेकिंग चार्ज नहीं लगता और उन्हें तुरंत बेचा जा सकता है. ज्वैलर्स ने ग्राहकों को लुभाने के लिए कारीगरी शुल्क में छूट दी, लेकिन इसका असर सीमित रहा.

2025 में 24 फीसदी घटी गहनों की डिमांड

विश्व स्वर्ण परिषद के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत में गहनों की मांग 24 फीसदी घट गई, जबकि निवेश की मांग 17 फीसदी बढ़कर 2013 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. इसका मतलब साफ है कि सोना अब सिर्फ त्योहारी खरीदारी तक सीमित नहीं रहा है. लोग अब पूरे साल कीमतों पर नजर रखते हैं और गिरावट पर ही खरीदारी करते हैं. यह बदलाव दिखाता है कि सोना अब एक परंपरा से हटकर पोर्टफोलियो का हिस्सा बन गया है.

क्या अब भी सोना खरीदना सही?

लॉन्ग टेल वेंचर्स के परमदीप सिंह कहते हैं कि अक्षय तृतीया पर अक्सर लोग सोने में ज्यादा निवेश कर देते हैं, जो सही नहीं है. मौजूदा कीमतों पर सोने को पोर्टफोलियो का 5-10 फीसदी ही रखना चाहिए. युवा निवेशकों के लिए गहनों के मुकाबले गोल्ड ईटीएफ या डिजिटल गोल्ड बेहतर विकल्प हैं. वहीं, फाइनैटवर्क के सौरभ बंसल के अनुसार, त्योहार पर भावनात्मक खरीदारी ठीक है लेकिन निवेश का फैसला एसेट एलोकेशन पर आधारित होना चाहिए. अगर पोर्टफोलियो में सोना पहले से मौजूद है तो अतिरिक्त खरीदारी जरूरी नहीं.