मुंबई: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव भरा माहौल रहा. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में शुरुआती घंटे में गिरावट दर्ज की गई. मुख्य वजह कच्चे तेल की तेजी और मध्य पूर्व में फिर से बढ़ा तनाव है. होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की कार्रवाई के बाद तेल की कीमतें ऊंची उछाल पर पहुंच गई हैं. इससे मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ गया है. वैश्विक संकेत मिश्रित रहने के बावजूद घरेलू बाजार पर दबाव बना हुआ है.
कच्चे तेल की कीमतें 6 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई हैं. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर से नियंत्रण सख्त कर दिया है. ब्रेंट क्रूड 95-98 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच गया है. भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि इससे महंगाई बढ़ सकती है. बाजार विश्लेषकों का कहना है कि तेल की कीमतों में यह उछाल पूरे बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रहा है.
वैश्विक बाजारों में सतर्कता दिख रही है. अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में 0.8 फीसदी की गिरावट आई है. एशियाई बाजार भी मिश्रित कारोबार कर रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में अनिश्चितता बनी हुई है. पिछले सप्ताहांत में हुई घटनाओं ने सीजफायर की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. निवेशक अगले 48 घंटों के घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं.
मध्य पूर्व में तनाव फिर से बढ़ गया है. होर्मुज में व्यवधान के कारण बाजार में जोखिम की भावना मजबूत हो गई है. विश्लेषक कहते हैं कि इस क्षेत्र में शांति प्रक्रिया अभी कमजोर है. वीके विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में डी-एस्केलेशन और एस्केलेशन का यह ड्रामा बाजार को अस्थिर रखेगा.
भारत VIX करीब 7 फीसदी बढ़कर 18.40 के स्तर पर पहुंच गया है. इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक जोखिम के कारण निवेशक सतर्क हो गए हैं. बैंकिंग शेयरों में थोड़ी मजबूती दिखी लेकिन रियल्टी, ऑटो और मेटल सेक्टर में गिरावट रही. निफ्टी 24,100 के स्तर पर सपोर्ट पा रहा है जबकि 24,570-24,800 के बीच रेजिस्टेंस है. व्यापारी खरीदारी पर गिरावट और बिकवाली पर रैली की रणनीति अपना रहे हैं. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी दबाव में हैं. कमोडिटी और आयातित महंगाई के जोखिम के बावजूद बाजार अभी घबराहट से दूर है.