नई दिल्ली: केंद्रीय बजट आज पेश हो रहा है. भारत में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री भी इस बजट से काफी उम्मीदें कर रहा है. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, मैन्युफैक्चरिंग कॉम्पिटिटिवनेस और ग्लोबल ट्रेड इंटीग्रेशन पर फोकस किया गया है, जिसके साथ ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियां और इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स को काफी उम्मीदें हैं. माना जा रहा है कि बजट 2026 तेजी से बदलते माहौल में ग्रोथ बनाए रखने के लिए जरूरी पॉलिसी क्लैरिटी और फाइनेंशियल सपोर्ट उपलब्ध कराया जाएगा.
एक रिपोर्ट के अनुसार, बजट 2026 से ग्रीन मोबिलिटी सॉल्यूशन्स को मजबूत किया जा सकता है. इसमें एक प्रस्ताव भी शामिल है, जिसमें यूनिफाइड EV सुपर ऐप मौजूद है. बता दें कि यह ऐप रियल-टाइम स्लॉट बुकिंग, इंटीग्रेटेड पेमेंट, चार्जर की उपलब्धता अपडेट और PM ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में डिप्लॉयमेंट को ट्रैक करने के लिए प्रोग्रेस डैशबोर्ड देकर इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम को आसान बनाएगा. देखा जाए तो इस तरह के डिजिटल इंटीग्रेशन का मकसद भारत को सस्टेनेबल मोबिलिटी में तेजी लाना, EV ओनरशिप को आसान बनाना और चार्जिंग की सुविधा को बेहतर बनाना शामिल है.
इसके साथ बजट 2026-27 से यह भी उम्मीद की जा रही है कि वो डॉमेस्टिक बैटरी के गीगाफैक्ट्रीज के लिए नए इंसेंटिव पेश कर सकता है. इसके साथ ही वायबिलिटी गैप फंडिंग और टैक्स छूट जैसे तरीकों से भारत के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर सकता है.
बजट में टॉप इंटरनेशनल कार बनाने वाली कंपनियों के लिए इंपोर्ट टैक्स (ड्यूटी) में कुछ बदलाव होने की संभावना है, खासकर इलेक्ट्रिक कारों के लिए जो भारत में बहुत तेजी से बढ़ रही हैं. इन टैक्स को स्मार्ट तरीके से कम या फिक्स कर सकते हैं. साथ ही कुछ अच्छे इनाम या फायदेभी दिए जा सकते हैं. इससे बड़ी ग्लोबल कंपनियों को भारत में क्लीन, ग्रीन गाड़ियां बनाने में ज्यादा पैसा और मेहनत लगाने के लिए बढ़ावा मिल सकता है.
ऐसा माना जा रहा है कि यह भारतीय-निर्मित कारों को इस बजट में लगातार मदद की जरूरत है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि सड़कें बनाने और बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए ज्यादा पैसा देना, साथ ही कस्टम नियमों (इंपोर्ट/एक्सपोर्ट पर टैक्स) को ठीक करना, बहुत सही समय होगा. ये कदम ट्रेडिंग को आसान बनाएंगे और भारत की पूरी ग्रोथ पावर को अनलॉक करने में मदद करेंगे.